मंझनपुर। बोर्ड परीक्षा के दूसरे दिन शुक्रवार को पहली पाली में हाईस्कूल संगीत और इंटरमीडिएट गृहविज्ञान की परीक्षा थी। सिर्फ 19 केंद्रों में आयोजित परीक्षा में 1040 में 918 परीक्षार्थी की उपस्थित हुए। दूसरे दिन भी 122 परीक्षार्थी इम्तहान से गैरहाजिर रहे। डीआईओएस ने बताया कि दो दिन की ही परीक्षा में अब तक 9843 छात्र-छात्राएं परीक्षा छोड़ चुके हैं। उनका दावा है कि नकल रोकने को बरती जा रही सख्ती से बच्चे परीक्षा छोड़ रहे हैं। हालांकि माना यह जा रहा है कि नकल के ठेकेदार मनमाफिक स्कूलों को परीक्षा केंद्र नहीं बना पाने के कारण दूसरे जिले और राज्यों से आने वाले छात्र-छात्राओं से प्रवेशपत्र ही नहीं दिए हैं।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के दूसरे दिन शुक्रवार को लड़कियों के रुचि वाले विषय संगीत और गृहविज्ञान की परीक्षा थी। डीआईओएस ने बताया कि दोनों विषयों में जिले से सिर्फ 1040 छात्राएं ही पंजीकृत थी। इससे सिर्फ 19 केंद्रों पर परीक्षा थी। इसमें से भी 918 परीक्षार्थी ही परीक्षा में शामिल हुए। उधर, परीक्षा के दूसरे दिन भी कौशाम्बी के अफसर और उड़ाका दलों को एक भी नकलची नहीं मिला।
बृहस्पतिवार को ही स्टेटिक मजिस्ट्रेट ने बेला देवी स्कूल सेवढ़ा से दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते पांच मुन्नाभाईयों को दबोचकर पुलिस के हवाले किया था। इस धरपकड़ से जिले के सभी परीक्षा केंद्रों में हड़कंप मचा हुआ है। नकल को लेकर बरती जा रही सख्ती को देखते हुए नकल माफियाओं ने अब परीक्षा केंद्रों पर तैनात किए स्टेटिक मजिस्ट्रेटों पर डोरा डालना शुरू कर दिया है।
बता दें कि डीएम राजमणि यादव नकलमंडी के रूप में कुख्यात कौशाम्बी की बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन कराने के लिए सभी 86 परीक्षा केंद्रों में जिलास्तरीय अफसरों को स्टेटिक मजिस्ट्रेट बनाकर ड्यूटी पर लगा दिया है। उन्हें हिदायत दी गई है कि क्रास चेकिंग में यदि परीक्षा केंद्र में नकल होती मिली, तो सीधे वे इसके लिए जिम्मेदार माने जाएंगे। साथ ही उन्होंने तीसरे दिन स्टेटिक मजिस्ट्रेटों के तैनाती स्थल बदलने का भी फरमान जारी किया है। इससे स्टेटिक मजिस्ट्रेट भी नकलमाफियाओं की शायद इस बार कोई मदद नहीं कर पाएंगे।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा में जिला प्रशासन ने अपनी सारी ताकत नकल रोकने में लगा रखी है। पर, इस सख्ती के बाद भी रसूखदार नकलमाफिया फर्जी कक्ष निरीक्षक ों की तैनाती कराने में सफल रहे हैं। बता दें कि सिराथू क्षेत्र में गली-गली संचालित वित्तविहीन स्कूलों की सारी गतिविधियां बोर्ड परीक्षा तक ही सीमित रहती हैं। ऐसे में इन विद्यालयों में ज्यादातर अध्यापक सिर्फ कागजों में ही अध्यापक कार्य कराते हैं। सूत्रों के मुताबिक बोर्ड परीक्षा के दौरान जब ड्यूटी के लिए शिक्षकों की मांग की जाती है, तब वे मनमाफिक व्यक्ति को शिक्षक बताकर उसका ब्यौरा डीआईओएस दफ्तर भेज देते हैं। शिक्षा विभाग के अफसर स्कूलों से भेजे गए फर्जी शिक्षकोें की बगैर कोई जांच कराए उन्हें कक्षनिरीक्षक के लिए ड्यूटी कार्ड जारी कर देते हैं। इस बार भी तमाम फर्जी अध्यापक कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी कर रहे हैं।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा के लिए राजापुर चित्रकूट की रहने वाली रीता देवी पुत्र रामफल ने नारा गांव के एक व्यक्ति को फार्म भराने के लिए 4000 रुपये दिए थे। रीता देवी ने बताया कि उक्त व्यक्ति ने उसे बताया था कि उसका फार्म भर दिया गया है। साथ ही उसने 19 फरवरी की सुबह उसे सैनी स्कूल के सामने प्रवेशपत्र के लिए बुलाया था। छात्रा ने बताया कि सैनी स्कूल के सामने वह घंटों उस व्यक्ति का इंतजार करती रही, लेकिन वह प्रवेशपत्र देने आया ही नहीं। इतना ही नहीं अब उसका मोबाइल भी स्विचआफ है। परीक्षा छूटने से परेशान छात्रा ने शुक्रवार को इसकी तहरीर मंझनपुर कोतवाली पुलिस में दी है। एसओ ने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है।