चरवा (ब्यूरो)। रामवन गमन से जुड़ी चरक मुनि की तपोस्थली में आयोजित तीन दिवसीय रामायण मेले का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। इस दौरान जहां मानस विदुषी स्तुति बहन ने रामकथा सुनाकर लोगों से भगवान राम के आदर्शों को आत्मसात का आह्वान किया। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने राम वनगमन से जुड़ी इस पावन धरा के सौंदर्यीकरण का संकल्प दोहराया।
चायल तहसील का चरवा गांव भगवान राम के वनगमन का गवाह रहा है। मान्यता है कि गंगा पार करके भगवान राम ने सिया और लखन के साथ यहीं विश्राम किया था। रात्रि निवास के बाद भगवान ने जिस ताल में स्नान किया था। वह तालाब अब भी रामजूठा तालाब के नाम से विख्यात है। साथ ही यहीं चरक मुनि की तपोस्थली भी थी। इसी धार्मिक स्थल पर 17 से 19 फरवरी तक रामायण मेेले का आयोजन किया गया था। पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार ने जहां इसका शुभारंभ करते हुए चरवा धाम को प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में लाने का वादा किया था।
वहीं समापन के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश कुशवाहा ने कहा कि यह धाम बहुत ही पावन है, जो अब तक उपेक्षा का शिकार था। अब इसकी उपेक्षा और नहीं होगी। उन्होंने धाम के सौंदर्यीकरण में हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। कहा कि जल्द ही इसके सौंदर्यीकरण का काम शुरू होगा। रोशनी और पानी के लिए सौलर लाइट और सोलर पंप लगाए जाएंगे। वहीं जिपं सदस्य रजनीश पांडेय ने इस धार्मिक स्थल को फोरलेन से जोड़े जाने की मांग शासन-प्रशासन से की है।
इससे पहले मेले के आखिरी दिन प्रवचन करते हुए स्तुति बहन ने रामकथा लोगों को सुनाई। उन्होंने कहा कि समाज का उत्थान राम के आदर्शों को अपनाने से ही संभव है। कहाकि रामकथा का एक-एक प्रसंग जीवन जीने की सच्ची राह दिखाता है। इसके आत्मसात से ही समाज के बिगड़ते स्वरूप को बचाया जा सकता है। इस मौके पर अनिरुद्ध कुमार, विनय तिवारी, महंत रामेश्वर दास, फूलचंद दूबे, केशव प्रसाद गुप्ता, कृष्णपाल तिवारी आदि मौजूद रहे।