मंझनपुर। भीषण गर्मी की वजह से बिलों में कैद जहरीले सांप बरसात होते ही बाहर निकल रहे हैं। इन विषधरों का रोजाना कोई न कोई शिकार हो रहा है। जागरूकता के अभाव में लोग पीड़ित को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण महीने भर के भीतर जिले में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 23 लोगों का संयुक्त जिला चिकित्सालय में उपचार कराया गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण इलाके की है।
एक जुलाई को चरवा के जलालपुर निवासी मनोज की पत्नी सविता देवी को सर्प ने डंस लिया। घरवाले पहले झाड़फूंक करा रहे थे बाद में जिला अस्पताल ले गए। अस्पताल में इंजेक्शन लगाने के बाद भी सविता की जान नहीं बचाई जा सकी। 10 जुलाई पइंसा के घटमापुर गांव में नरेंद्र की पत्नी विमला को घर के अंदर सर्प ने डस लिया। घरवाले सविता को इलाज के लिए लाने के बजाय ओझा के पास ले लए। सविता की भी मौत हो गई।
करारी इलाके के म्योहर गांव निवासी सुरेमन की आठ वर्षीय बेटी रात को घर के बाहर थी। हल्की बरसात हो रही थी। इसी दौरान सर्प ने डंस लिया। परिजन घरेलू उपचार कर ही रहे थे कि मानसी की मौत हो गई। महीने भर पहले सिराथू तहसील के निजामपुर नौगीरा गांव में प्राथमिक स्कूल की रसोइएं को सर्प ने डस लिया। घरवाले इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। लेकिर रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
वहीं जिला अस्पताल के डॉ. विजय केसरवानी जिस स्थान पर सर्प ने डसा है वहां से ऊपर के तीन अलग-अलग स्थानों पर रस्सी से बांध दें। इसके अलावा नई ब्लेड से जहां सर्प ने डसा है वहीं पर चीरा लगा दें। इसके बाद फौरन पीड़ित अस्पताल ले जाएं। कोशिश करें की मरीज सोने नहीं पाए।
सीएमएस जिला अस्पताल का कहना है कि जिला अस्पताल में सांप के डसने के पर्याप्त इंजेक्शन हैं। अस्पताल में 24 घंटे सेवा रहती है। सर्पदंश के शिकार लोगों को अस्पताल लाकर इलाज कराएं। सपेरे मुन्नूर लाल का कहना है कि बरसात के दिनों सांप अपनी बांबी से बाहर निकलता है। सांप इंसान से डरता है, इस वजह से वह घर के किसी कोने में दुबका रहता है। इसलिए अंधेरे में जाने के दौरान टार्च साथ रखें। रात को बिस्तर से उठना हो तो पहले नीचे रोशनी से देख लें। जिस कमरे में समान ज्यादा हों वहां आने-जाने के दौरान खास अतिरिक्त सतकर्ता बरतें।
मुन्नूलाल सपेरा, कौैशाम्बी