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691 तालाबों में पाली जाएगी गम्बूसिया मछली

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691 तालाबों में पाली जाएंगी गम्बूसिया मछली
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-डेंगू से प्रभावित रहे 35 गांवों के तालाब चिह्नित
-मछली पालन के लिए स्वास्थ्य विभाग से मांगा गया बजट
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। डेंगू से प्रभावित रहे 35 गांवों के तालाबों में अब गम्बूसिया मछली पाली जाएंगी। इसके लिए 691 तालाब चिह्नित किए गए हैं। मछली पालन के लिए स्वास्थ्य विभाग से बजट की मांग की गई है। बजट मिलते ही मत्स्य पालन विभाग गम्बूसिया मछली खरीदकर तालाबों में डलवाएगा।
पिछले साल जिले के 35 ग्राम डेंगू से प्रभावित थे। इनमें सेसा, करारी, दीवर कोतारी, शाहपुर टिकरी, जाफरपुर महांवा, सोनौली, महेवाघाट, चांदेराई, महिला, मवई, विदांव, छेकवा, बंधुरी, टिकरी मुजफ्फरपुर, थोन, सिराथू, कोर्रो, टेंगाई, करनपुर चौराहा, रामपुर सुहेला, अजुहा, सौंरई बुजुर्ग, शहजादपुर, भरवारी आदि गांव शामिल थे। डेंगू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए दो माह पहले अधिकारियों ने बैठक कर इसको खत्म करने की रणनीति बनाई थी। फैसला लिया गया था कि डेंगू खत्म करने के लिए प्रभावित गांवों के तालाबों में गम्बूसिया मछली पाली जाए। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पारसनाथ ने डीएम के निर्देश पर मत्स्य पालन विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से प्रभावित गांवों की सूची ली, इसके बाद तालाबों का सर्वे किया। कुल 691 तालाब चिह्नित किए गए हैं। इन्हीं तालाबों में मछलियां पाली जाएंगी। सर्वे के बाद मत्स्य पालन विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से मछली पालन के लिए बजट मांगा है।
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मच्छरों का लारवा खाती हैं गम्बूसिया
डेंगू की रोकथाम के लिए गम्बूसिया मछली पालन ही सबसे कारगर तरीका है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पारसनाथ ने बताया कि गम्बूसिया मछली मच्छरों का लारवा खाती है। गम्बूसिया मछली जिन गांवाें में पाली जाएंगी वहां मच्छर खत्म हो जाएंगे। इसका लाभ ग्रामीणों को जरूर मिलेगा।
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13 हजार से ज्यादा डाली जाएंगी मछलियां
35 गांवों के तालाबों में 13 हजार से ज्यादा मछलियां डाली जाएंगी। ये मछलियां पश्चिम बंगाल से मंगवाई जांएगी। चेन्नई से भी मछली आने की संभावना है। विभाग ने इसके लिए हेचरी वालों से कोटेशन मांगा है। लगभग 55 हजार रुपये का खर्च है। यह रकम स्वास्थ्य विभाग देगा।
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आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत
डेंगू से पिछले साल आधा दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इनमें भरवारी और करारी के दो-दो लोग थे। इनके अलावा दर्जनों की संख्या में लोग बीमार थे। अधिकांश लोगों का इलाज निजी अस्पतालों में हुआ था। स्थिति खतरनाक होने पर स्वास्थ्य विभाग ने यह पहल शुरू की है।
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