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शहीद की जंग लड़ेंगे सांसद व विधायक

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शहीद की जंग लड़ेंगे सांसद और विधायक
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सांसद ने कहा, डीएम से वार्ता कर शहीद के आश्रितों को दिलाएंगे हक
कौशाम्बी की शान हैं भारत-पाक का युद्ध लड़ने वाले शहीद बच्चूलाल
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
शहीद बच्चूलाल यादव के आश्रितों की जंग अब प्रशासन से बीजेपी सांसद व विधायक लड़ेंगे। चायल विधायक संजय गुप्ता के बाद सांसद और विधायकों ने भी शहीद के आश्रितों को उनका हक दिलाने की पैरोकारी शुरू कर दी है। सांसद का कहना है कि शहीद बच्चूलाल यादव कौशाम्बी की शान हैं। भारत-पाक के ऐतिहासिक युद्ध में उनकी शहादत हुई थी। वह जिले के गौरव हैं उनके मान-सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।
चायल के जलालपुर शाना मजरा महराज का पुरा निवासी बच्चूलाल यादव 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान के युद्ध में शहीद हो गए थे। बच्चूलाल यादव फौज में लांसनायक थे। उनकी शहादत पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के संवेदना पत्र के आधार पर आश्रितों को दस बीघा जमीन का पट्टा मिला था। इस जमीन पर बच्चूलाल के परिजन खेती-किसानी करते थे। करीब 45 साल बाद चकबंदी अधिकारी (प्रथम) ने उनकी भूमि का पट्टा खारिज कर दिया। अब कहा जा रहा है कि जो भूमि उन्हें पट्टे में मिली थी वह शमसान व तालाब की है। इसकी जानकारी होते ही बच्चूलाल के बेटों के होश उड़ गए। बच्चूलाल दो बेटे, राजेंद्र कुमार और कृष्ण कुमार फौज में हैं जबकि छोटा बेटा राजकुमार किसान है। फौजी बेटे अपने पिता के नाम पर मिली जमीन के लिए जंग लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही है। हालांकि डीएम ने इस मामले में तहसील प्रशासन व चकबंदी अधिकारी से जवाब तलब किया है। साथ ही विधिक राय भी मांगी है। शहीद के परिवार के साथ हुए इस मजाक से भाजपा सांसद व विधायक भी नाराज हैं। पहले चायल विधायक संजय गुप्ता ने इस मामले को लेकर हुंकार भरी थी अब सांसद विनोद सोनकर व सदर विधायक लाल बहादुर ने भी शहीद की पैरोकारी शुरू कर दी है। सांसद का कहना है कि शहीद बच्चू लाल यादव के मान सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। इस मामले में डीएम से भी वार्ता कर शहीद के आश्रितों को दोबारा जमीन दिलाई जाएगी। लालबहादुर का कहना है कि वह भी इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत करेंगे।
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अपात्र कहने पर भड़के विधायक
सदर विधायक लालबहादुर रिटायर्ड फौजी हैं। शहीद बच्चूलाल यादव के आश्रितों की जमीन खारिज करने पर उन्होंने नाराजगी जताई है। वह फौजी के आश्रितों को अपात्र बताए जाने से खफा हैं। उनका कहना है कि जब बच्चूलाल शहीद हुए थे तब उनके बच्चे छोटे-छोटे थे। ऐसे में सरकार ने संवेदना के आधार पर जमीन दी थी। अब वह आज क्या हैं और किस हैसियत में हैं, इस आधार पर उनको जमीन का आवंटन न देने की बात सरासर गलत है। बताया कि मैं भी फौजी था, फौजियों का दर्द समझता हूं। इस संबंध में वह भी डीएम से बातचीत करेंगे।
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