मंझनपुर। गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम अब टीबी मरीजों को खोजेगी। गंगा-यमुना की तराई में बसी मजदूर बस्ती व बीड़ी श्रमिकों को प्राथमिकता पर रखा जाएगा। अभियान की शुरुआत 24 फरवरी को होगी। इसके बाद पखवारे भर अभियान चलाकर टीबी रोगियों की पहचान की जाएगी दवाएं दी जाएंगी।
जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए क्षय रोग विभाग ने तैयारी कर ली है। रोगियों की पहचान करने और उन्हें इलाज मुहैया कराने के लिए 24 फरवरी से अभियान चलाया जाएगा। पखवारे भर चलने वाले इस अभियान में पहले सप्ताह गंगा-यमुना किनारे मजदूर बस्ती, बीड़ी बनाने वाले मजदूरों व भट्ठे पर काम करने वाले मजदूरों की जांच की जाएगी। पीड़ित होने पर मुफ्त में इलाज किया जाएगा। अभियान 10 फरवरी तक चलाया जाएगा। वहीं जिला कोआर्डिनेटर टीबी एचआईवी का कहना है कि जिन लोगों में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं उनकी नि:शुल्क जांच की जाती है। बीमारी की पुष्टि होने पर नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र से उन्हें मुफ्त दवा उपलब्ध कराई जाती है। बीमारी ठीक करना विभाग की जिम्मेदारी है। वहीं जिला क्षय रोग अधिकारी का कहना है कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है। यह एक मरीज से दूसरे में आसानी से फैल सकती है। ऐसे मरीजों को उचित देखभाल के साथ ही समय पर दवा खिलाएं तो पूरी तरह से ठीक हो जाती है। 24 फरवरी से मरीजों की खोज के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों के कर्मियों को सोमवार से प्रशिक्षिण दिया जाएगा।