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लाभार्थी परिवार की नई बहु व नए बच्चे को भी ‘आयुष्मान भव’

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आयुष्मान भारत में लाभार्थी परिवार के नए सदस्यों के लिए अच्छी खबर है। खबर है कि वर्ष 2011 के बाद परिवार में जुड़े नए सदस्यों को भी योजना में शामिल किए जाएंगे। बस इसके लिए उन्हें जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। केंद्र सरकार के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने नए सदस्यों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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केंद्र सरकार ने 23 सितंबर 2018 को देश भर में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना चालू की है। इसके तहत वर्ष 2011 की सामाजिक, आर्थिक जनगणना में चिह्नित गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की व्यवस्था की गई है। जिले में योजना के तहत 1,16,151 परिवार चिह्नित किए गए हैं। मुसीबत ये है कि साल 2011 के दौरान चिह्नित परिवारों में सात साल के दौरान कुछ सदस्य बढ़ गए हैं।

लड़कों की शादियां होने के बाद घर में बहू आ गई, या फिर नए बच्चों ने जन्म लिया है। पर, परिवार के इन सदस्यों को योजना में जगह नहीं मिली। इससे लाभार्थी परिवारों को दिक्कत हो रही थी। देश भर से मिल रही इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने योजना की गाइड लाइन में संशोधन किया है। नई गाइड लाइन के तहत सरकार ने अब परिवार में शामिल नए सदस्यों को भी योजना से जोड़ने का निर्देश दिया है।
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नए सदस्यों को लगाने होंगे ये जरूरी दस्तावेज
आयुष्मान भारत के लाभार्थी परिवार के किसी सदस्य की शादी 2011 के बाद हुई है तो उसका नाम सूची में शामिल कराने के लिए विवाह प्रमाणपत्र लगाना होगा। ग्रामीण क्षेत्र के लाभार्थी को ग्राम प्रधान द्वारा प्रमाणित तथा नगरीय क्षेत्र के परिवारों को निकायों से प्रमाणित प्रमाण पत्र लगाना होगा। प्रमाण पत्र को आयुष्मान केंद्र या फिर कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर संलग्न कराना होगा। इसी तरह से नए जन्म लिए गए बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र भी ग्राम/नगर निकाय द्वारा प्रमाणित कराकर जमा करना होगा।

योजना का खास-खास
-1,16,151 परिवार है आयुष्मान भारत में चिह्नित
-6087 परिवारों के बनाए जा चुके हैं गोल्डेन कार्ड
-09 अस्पतालों को इलाज के लिए किया गया है इम्पैनल्ड
-225 मरीजों का इलाज के लिए हो चुका है पंजीकरण
-165-मरीज योजना के तहत करा चुके हैं इलाज

लाभार्थी परिवार की नई बहू और नए बच्चों को जोड़ने का काम तेजी से किया जा रहा है। बस इसके लिए लाभार्थी परिवार को विवाह/जन्म प्रमाण पत्र जमा कराया जा रहा है।
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डॉ ओम त्रिपाठी-जिला-डीपीसी, आयुष्मान भारत
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