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विकसित समाज रूपी इमारत की मजबूत नींव होती है नारी

Thu, 10 Jan 2019 06:30 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, मंझनपुर।
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मंझनपुर। अमर उजाला-100 मिलियन स्माइल के तहत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान मंझनपुर में प्रशिक्षण ले रही डीएलएड की छात्राओं ने निबंध के जरिए पूरी बेबाकी से अपनी अभिव्यक्ति बयां की। महान चिंतक का जिक्र करते हुए लिखा कि अगर आप एक पुरुष को शिक्षित करेंगे तो उसका व्यक्तिगत स्तर बढ़ेगा। स्त्री के शिक्षित होने से आप परिवार, समाज व राष्ट्र का स्तर बढ़ा रहे हैं।
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नारी गरिमा और सम्मान को संकल्पित अमर उजाला फाउंडेशन की पहल को कॉलेज स्टाफ ने भी जमकर सराहा।

प्रशिक्षुओं ने निबंध के जरिए लिखा कि समाज में उन्हें काफी कुछ मिला है लेकिन लोगों की छोटी सोच व गलत मानसिकता नारी सशक्तिकरण के असल मायने को हकीकत में तब्दील नहीं होने दे रहे हैं। परिवार से लेकर समाज तक की सोच बेटी को लेकर कुंठित हो जाती है। बेटी पैदा होने की जानकारी होने मात्र से ही लोग भ्रूण हत्या तक कराने के लिए आमादा हो जाते हैं।

अगर घर में बेटियों को भी वह दर्जा मिले जो बेटों को दिया जाता है बेटियां समाज को नई ऊर्जा व गति देने में काफी हद तक सक्षम है। कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके श्रीवास्तव ने समाचार पत्र की सोच व प्रयास की सराहना की है। प्रवक्ता संदीप तिवारी और अरमा देवी ने कहा कि नारी गरिमा को लेकर अमर उजाला का प्रयास बहुत ही सराहनीय है। निश्चित तौर पर इस तरह के आयाम समाज में बदलाव होने के संदेश देते हैं। इस मौके पर प्रवक्ता वीके सिंह, एके सिंह, बीडी मिश्र, संजय भद्र, पूर्णिमा गौड़, नरेंद्र कुमार, कौशलेंद्र मिश्रा आदि लोग मौजूद रहे।
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नारी शब्द ही अपने आप में बहुत वृहत स्वरूप है। समाज में नारी के विविध रूप हैं। नारी समाज का महत्वपूर्ण अंग हैं। बिना नारी के समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। नारी ही समाजरूपी इमारत की मजबूत नींव होती है।
शिवानी मिश्रा, डीएलएड प्रशिक्षु

देश के विकास में 50 फीसदी का योगदान नारियों का है। आदि काल से नारी ने रानी लक्ष्मीबाई, मदर टरेसा, रजिया सुल्तान आदि का रूप दिखाया है। आज मलाला युसुफजई, साक्षी मलिक और दीपा कर्माकर ने अपनी प्रतिभा के दम पर समाज में लोहा मनवाया है।
यासमन फात्मा, डीएलएड प्रशिक्षु

अगर हम आसान शब्दों में महिला सशक्तिकरण को समझें तो मतलब होता है महिलाओं को शक्ति प्रदान करना। शक्ति का मतलब यह नहीं कि उसे किसी ताकत की जरूरत है बल्कि उसे मौका दिया जाए।
शालिनी देवी, डीएलएड प्रशिक्षु

ग्रंथों में नारियों को ऊंचा स्थान दिया गया है लेकिन मौजूदा हालात में भेदभाव की वजह से बेटियों को वह दर्जा नहीं मिल पा रहा है जिसकी वह असल हकदार हैं। बेटे-बेटी का भेदभाव मिटाकर अगर उन्हें भी बराबरी का दर्जा मिले तो वह कुछ भी कर सकती हैं।
चांदनी त्रिपाठी, डीएलएड प्रशिक्षु

बदलाव की आहट है अमर उजाला
नारी सशक्तिकरण को लेकर चलाई जा रही अमर उजाला की पहल की सराहना करते हुए डायट प्रवक्ता संदीप तिवारी व अरमा देवी का कहना है कि अमर उजाला की मुहिम समाज में बदलाव की आहट है। किसी समाचार पत्र का यह प्रयास निश्चित तौर पर समाज को नई दिशा देगा।
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