सोरोंजी। तीर्थनगरी के रेलवे स्टेशन के समीप स्थित विशाल रेलवे पार्क प्रशासनिक अनदेखी से बदहाली का शिकार होकर खंडहर में तब्दील हो चुका है। करीब 10 हजार वर्ग फुट में फैला यह पार्क आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है जिसके सौंदर्यीकरण की मांग स्थानीय लोगों ने जोर-शोर से उठाई है।
स्थानीय निवासी गोपाल भारद्वाज के अनुसार, लगभग एक दशक पहले जब रेलवे स्टेशन का कायाकल्प हुआ था, तब इस पार्क में बैठने के लिए बेंच, बच्चों के झूले, रेलिंग लगाकर भगवान वराह की मूर्ति स्थापना, रंगीन लाइट और फव्वारा चलाने जैसी योजनाएं प्रस्तावित थीं। हालांकि, रेलवे अधिकारियों की उदासीनता के कारण पार्क कभी विकसित ही नहीं हो सका।
वर्तमान में यहां कई फीट ऊंची घास उगी है, जहां जानवर लगातार गंदगी फैलाते रहते हैं। पार्क के पास से गुजरने पर उठने वाली तेज दुर्गंध से राहगीरों का चलना मुहाल हो गया है। राकेश बिड़ला और अजय कुमार का कहना है कि तीर्थनगरी में देश-विदेश से रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है, ऐसे में रेलवे स्टेशन के पास प्रमुख स्थल का ऐसा उपेक्षित हाल विभाग की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
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लोगों की बात-
- प्रमुख पौराणिक तीर्थनगरी में रेल प्रशासन द्वारा पार्क विकसित न कराया जाना ठीक नहीं है। रेलवे स्टेशन के समीप पार्क विकसित होने से श्रद्धालुओं को भी इसका लाभ मिलेगा। - श्रीभगवान उपाध्याय, स्कूल प्रबंधक
- रेलवे स्टेशन के नजदीक उपेक्षित पड़ा पार्क लोगों को मुंह चिढ़ा रहा है। पार्क में सुंदर फूलों के पौधे लगाकर, बेंच, बच्चों के झूले, फव्वारे, हल्की रोशनी आदि लगाई जाए जिससे लोग आकर्षित होकर पार्क में घूमने आएं। - रामदर्शन महेरे, कारोबारी
वर्जन
पार्क के जीर्णोंद्धार के लिए नगरपालिका की ओर से रेलवे को पत्र लिखा जाएगा। कार्य न होने की स्थिति में रेल प्रशासन से मुलाकात करेंगेद्ध - रामेश्वर दयाल महेरे, पालिकाध्यक्ष
फोटो 15 सोरोंजी का बदहाल रेलवे पार्क। स्रोत: संवाद
फोटो 15 सोरोंजी का बदहाल रेलवे पार्क। स्रोत: संवाद