कासगंज/ पटियाली। गंगा का कोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 40 दिनों से बाढ़ आपदा का सामना कर रहे आठ गांवों के ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। रास्तों के कटे होने और जलभराव के चलते नाव ही आवागमन का एकमात्र सहारा बची है। हालांकि पिछले सप्ताह पानी कुछ कम हुआ था लेकिन पिछले 24 घंटों में जलस्तर फिर से 8 सेंटीमीटर बढ़ गया है जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव मूंझखेड़ा, नगला जैली, नगला खना, नगला दुर्जन, जयकिशन नगला और नगला दिपी सहित आसपास के गांवों पर है। खादर क्षेत्रों में पानी भरने से मक्का और बाजरा की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। इसके अलावा पशुबाड़े पानी से घिरने के कारण ग्रामीणों को पशुओं को बांधने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
चारागाह और खेत जलमग्न होने से न तो पशु चर पा रहे हैं और न ही हरा चारा मिल पा रहा है। जरूरत का सामान लाने और स्कूली बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए रोजाना जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ रही है।
स्थिति को देखते हुए सोरोंजी नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष पप्पू यादव ने शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर बाढ़ पीड़ितों को राहत और समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग उठाई है।
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बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से- 103520 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 93844 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 83835 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162. 58 मीटर के निशान पर
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काफी परेशानी हो रही है
-बाढ़ के पानी से गांव चारों तरफ से घिरा हुआ है। रास्ते कटे होने के कारण नाव से आवागमन करना पड़ रहा है। काफी परेशानी हो रही है। बाढ़ से पहले जरूरी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। - राकेश सिंह, मूंझखेड़ा
- गांव में पिछले 40-45 दिनों से बाढ़ का प्रकोप है। कामकाज प्रभावित है। खाने पीने का सामान गांव के बाहर जाकर लाना पड़ता है जिससे समस्या उत्पन्न होती है। बिजली भी नहीं मिल रही है।- मुकेश सिंह, मूंझखेड़ा
- बाढ़ प्रभावित इलाकों में मच्छरों का प्रकोप है जिससे बुखार के रोगी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाए हैं लेकिन निरंतर कैंप नहीं लग रहे- पेशकार सिंह, मूंझखेड़ा
- बाढ़ का पानी ठहरा होने के कारण काफी परेशानियां हैं। गांव के लोग ही नहीं, बल्कि पशु भी बीमारी के शिकार हो रहे हैं। पशुओं में भी बुखार की समस्या बढ़ी है।- घासीराम, मूंझखेड़ा।
फोटो 47- घासीराम, मूंझखेड़ा। संवाद
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