पटियाली। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। सोमवार को जलस्तर में भारी वृद्धि के बाद निचले इलाकों के कई गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और बाढ़ का पानी घरों की रसोई तक पहुंच गया है।
सिंचाई विभाग के मुताबिक, हरिद्वार बैराज से 1,21,147 क्यूसेक, बिजनौर से 1,32,811 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 99,297 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से दबाव लगातार बढ़ रहा है। मूंझखेड़ा, नगला दुर्जन, नगला नरपत, नगला खना, नगला पदम और नगला जयकिशन जैसे गांवों के रास्तों पर पानी भर गया है। घरों के आंगन में पानी घुसने से ग्रामीण अपना जरूरी सामान अनाज आदि चारपाइयों पर रखने को मजबूर हैं।
नगला दीपी निवासी अनार सिंह ने बताया कि संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन के लिए अब सिर्फ नाव ही एकमात्र जरिया बची है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पानी पार कर रहे हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी हो रही है। इसके अलावा, पिछले एक महीने से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे रातें अंधेरे में कट रही हैं और बच्चों की पढ़ाई बाधित है।
चारे का संकट और मच्छरों का प्रकोप
बाढ़ के पानी के कारण मवेशियों के लिए सूखा चारा जुटाना और उन्हें सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। जलभराव से मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ गया है। मूंझखेड़ा निवासी रुकुम पाल सिंह ने बताया कि एंटी-लार्वा छिड़काव के बावजूद राहत नहीं मिली है, इसलिए प्रभावित गांवों में नियमित फॉगिंग कराई जानी चाहिए। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
वर्जन
लगातार बैराजों से प्रवाह बढ़ रहा है। इससे जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। अभी जलस्तर में और वृद्धि होने की आशंका है। -शरद सौरभ गिरी, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
बुखार से वृद्ध की मौत के बाद पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
बाढ़ प्रभावित गांव नगला जैली में शनिवार को बुखार से ग्रामीण धर्म सिंह की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आकाश कुमार के नेतृत्व में सोमवार स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और घर-घर जाकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की।
स्वास्थ्य टीम ने गांव में कुल 69 मरीजों का परीक्षण किया, जिसमें बुखार के 21, त्वचा रोग के 28, खांसी-जुकाम के 14 और दस्त के 6 मरीज मिले सभी बुखार पीड़ितों की जांच की गई। आवश्यक दवाइयां वितरित की गईं। टीम में एमओ डॉ. लक्ष्मण मीना, सीएचओ फैसल,मनु शर्मा और रजित कांत मौजूद रहे।
वहीं, राजेपुर कुर्रा गांव में दो मेडिकल कैंप लगाए गए। गांव में कुल 125 मरीज का परीक्षण किया गया। एक कैंप में स्किन के 48, खांसी-जुकाम के 25, बुखार के 20, लूज मोशन के 15 और अन्य 17 मरीज शामिल हैं। वहीं दूसरे कैंप में कुल 54 मरीजों का परीक्षण किया गया। इसमें बुखार के 13, स्किन के 17, खांसी-जुकाम के 9, लूज मोशन के 8 और अन्य 7 मरीज मिले।