सिढ़पुरा। कमर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई पर रोक के बाद मिठाई व्यापारी और छोटे दुकानदार परेशान हैं। हालत ये हैं कि गैस के चूल्हे की आग ठंडा पड़ने लगी तो लकड़ी और कोयले की भट्ठियांे सहारा बनी हुई हैं।
गैस न मिलने के कारण अधिकांश मिठाई की दुकानों और छोटे होटलों पर ताले लगने की नौबत आ गई है। सुभाष मिष्ठान भंडार के प्रो. आयुष गुप्ता ने बताया कि गैस सिलिंडर किसी भी दाम पर उपलब्ध नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पांच साल में पहली बार गैस की भट्ठी बंद हुई है। फिलहाल, लकड़ी और उपलों की भट्ठियों पर काम करना पड़ रहा है।
यही हाल लाला इंद्रदेव मिष्ठान भंडार का है, जहां उपलों की आंच पर समोसे तले जा रहे थे। देवेन्द्र मिष्ठान भंडार (अमांपुर) के प्रो. हरदेस पाराशर और ब्रज स्वीट हाउस के विकास गुप्ता ने भी बताया कि गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के चलते अब कोयले और लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है।
गैस संकट पर चर्चा करते हुए प्रदीप गुप्ता ने एक दिलचस्प किस्सा भी बताया। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में गैस संकट हुआ था। अब ईरान-इजराइल युद्ध के चलते वैसे ही हालात पैदा हो गए हैं। उधर, भुल्लन पेटीज के मालिक भुल्लन ने बताया कि उनके पास मात्र एक-दो दिन का गैस का स्टॉक बचा है, इसके बाद आगे का काम भगवान भरोसे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि गैस के मुकाबले लकड़ी और कोयले पर काम काफी धीमे होता है और इससे लागत भी बढ़ रही है। और काम करना भी कठिन हो गया है। पूरे क्षेत्र में इस समय गैस की किल्लत है। ऐसे ही हालात रहे तो दुकान बंद करने की नौबत आ जाएगी।
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व्यापारियों की बातचीत
कोयले की भट्टी पर मिठाई बना रहे हैं। इसमें काफी समय लग रहा है और लागत भी बढ़ गई है। -आयुष गुप्ता, मिठाई व्यापारी
गैस सिलिंडर खत्म हो गए हैं। मिठाई बनाने के लिए लकड़ी और कोयले की भट्टी का सहारा लेना पड़ रहा है। -विकास गुप्ता, व्यापारी