- रोग-कीट प्रकोप से सावधान रहने की दी सलाह
-खेतों का निरीक्षण कर देखी फसल की स्थिति
संवाद न्यूज एजेंसी
कासगंज। रबी सीजन में सरसों की फसल में फूल आने के साथ ही यह अवस्था बेहद संवेदनशील मानी जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने गंजडुंडवारा क्षेत्र के गणेशपुर गांव में सरसों के खेतों का निरीक्षण किया और फसल की स्थिति पर जानकारी ली। उन्होंने किसानों को चेताया कि इस समय रोग और कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ सकता है इसलिए सावधानी आवश्यक है।
कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में करीब 22 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में इस वर्ष सरसों की खेती की गई है। वर्तमान में अधिकांश खेतों में फूल निकलने की अवस्था चल रही है। उन्होंने कहा कि यदि इस दौरान रोग या कीट लग जाते हैं तो उपज पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में किसान नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें और किसी भी प्रारंभिक लक्षण की स्थिति में तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाएं।
उन्होंने विभिन्न रोगों के लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा रोग में पत्तियों और फलियों पर गहरे कत्थई रंग के गोल धब्बे बनते हैं। सफेद गेरुई रोग में पत्तियों की निचली सतह पर सफेद फफोले दिखाई देते हैं,इससे पत्तियां पीली होकर सूखने लगती हैं और फूल आने पर पुष्पक्रम विकृत हो जाते हैं इससे फलियां नहीं बन पातीं।
तुलासिता रोग में पुरानी पत्तियों की निचली सतह पर छोटे धब्बे और उन पर सफेद रोयेदार फफूंद बन जाती है। यह बाद में पत्तियों को पीला कर सुखा देती है।
आरा मक्खी की सूंडियां पत्तियों को तेजी से खाती हैं और गंभीर प्रकोप में पौधे पत्ती विहीन हो सकते हैं। बग कीट पत्तियों, शाखाओं और फलियों का रस चूसकर उन्हें सुखा देता है। बालदार सूंडी समूह में रहकर पत्तियों को खाती है और बाद में पूरे खेत में फैल जाती है।
माहू पत्तियों, कोमल तनों और फूलों का रस चूसकर पौधों को कमजोर करता है जबकि पत्ती सुरंग कीट पत्तियों के अंदर सुरंग बनाकर हरे भाग को खा जाती है। इससे पत्तियों पर अनियमित सफेद रेखाएं बन जाती हैं। सरसों की फसल में कीट प्रबंधन के लिए गर्मी में खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए। फसल में संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए।