फोटो 02 कासगंज में गांधी मूर्ति के निकट एक पाइप की दुकान में भरा बारिश का पानी। स्रोत: संवाद
कासगंज। मानसून की पहली जोरदार दस्तक ने नगर पालिका कासगंज के नाला सफाई और जल निकासी के दावों की पोल खोलकर रख दी है। मूसलाधार बारिश के चलते शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह ठप हो गया, जिससे नाले-नालियां उफन गए। मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी गलियों तक में नालों का बदबूदार पानी भर गया, जिससे स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मानसून की दस्तक से पहले नगर पालिका ने बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए बड़ी-बड़ी कागजी तैयारियां की थीं। अफसरों ने दावा किया था कि नाला सफाई के लिए 10 से अधिक टीमें मैदान में उतारी गई हैं। सभी बड़े नालों से सिल्ट (कीचड़) निकालकर ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त कर दिया गया है। लेकिन बृहस्पतिवार को हुई पहली ही भारी बारिश ने इन दावों की हकीकत बयां कर दी। धरातल पर काम न होने का खामियाजा आज पूरे शहर को भुगतना पड़ा। नगर पालिका की लापरवाही के चलते बारिश थमने के घंटों बाद भी जलभराव की स्थिति जस की तस बनी रही। शहर के इन प्रमुख इलाकों में बाढ़ जैसे हालात नजर आए नदरई गेट बाजार, सोरों गेट बाजार, गांधी मूर्ति चौराहा, रेलवे रोड, बिलराम गेट और सूत की मंडी के हालत बदतर हो गए। तहसील रोड सहित आसपास की दर्जनों गलियों में घुटनों तक गंदा पानी भर गया, जो लोगों के घरों और प्रतिष्ठानों के भीतर तक दाखिल हो गया। लोगों का आरोप है कि हर साल नाला सफाई के नाम पर लाखों रुपये का बजट कागजों में खर्च किया जाता, लेकिन महज खानापूर्ति के लिए नालों की सफाई करा दी जाती है। इससे हर साल बारिश में लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है।
वर्जन
शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पुरानी है। मानसून से पहले नालों की तीन बार सफाई कराई जा चुकी है। बारिश में जहां-जहां जलभराव हुआ है, वहां जलनिकासी की व्यवस्था के लिए चार से पांच टीमें लगाई गई हैं। -विवेक त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
फोटो 02 कासगंज में गांधी मूर्ति के निकट एक पाइप की दुकान में भरा बारिश का पानी। स्रोत: संवाद