फोटो05कासगंज में एक आरओ एक प्लांट पर रखे पानी के कैंपर । संवाद
कासगंज। शहर में भले ही घर-घर नल से पेयजल पहुंचाने के दावे किए जा रहे हों। 10 हजार पेयजल कनेक्शन दिए गए हों, लेकिन लोगों का भरोसा आरओ और बोतलबंद पानी पर बढ़ता जा रहा है। शहर में 20 से अधिक रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) प्लांट संचालित हो रहे हैं। शादी-समारोह से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक, शुद्ध पानी के नाम पर लोग नल के बजाय प्लांट के पानी को प्राथमिकता दे रहे हैं।
नगर पालिका क्षेत्र की आबादी एक लाख से अधिक हैं। जल निगम की ओर से शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए 10 हजार कनेक्शन दिए गए हैं। इसके लिए 600 रुपये प्रतिवर्ष लोग जलकर के रूप में जमा करते हैं। नगर पालिका की ओर से पेयजल आपूर्ति दिए जाने के बाद भी लोग पीने के लिए आरओ पानी खरीद रहे हैं। शहर में 20 से अधिक आरओ प्लांट संचालित हैं। सर्दी के दिनों में इन प्लांट से 2 हजार से अधिक पानी के कैंपर की रोजाना बिक्री होती है। प्रत्येक प्लांट से 100 से 120 तक आरओ पानी के कैंपर बिकते हैं। गर्मी के दिनों में इनकी संख्या बढ़कर 220 से 250 तक पहुंच जाती है। इसके अलावा तमाम लोगों ने घरों में आरओ लगवा रहे हैं। पिछले तीन साल में शहर में आरओ की मांग 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़ गई है। गर्मी के मौसम 60 से 70 आरओ मशीन प्रतिमाह बिकती हैं। इसके पीछे की मुख्य वजह दूषित पानी की सप्लाई को माना जा रहा है। शहर में कई जगह पाइप लाइन में लीकेज बनी रहती है। इससे घरों को आपूर्ति किए जाने वाले पानी में गंदगी और बदबू की समस्या आमतौर पर रहती है। ऐसे में लोग स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ पानी पर निर्भर होते जा रहे हैं।
जल निगम के जेई विनीत कुमार ने बताया कि घरों में आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल की निरंतर जांच की जाती है। बीते दिनों शहर के अलग-अलग स्थान से पानी के 31 सैंपल लिए गए हैं। इनको जांच के लिए लैब भेजा गया है। इसके अलावा जहां से भी दूषित पानी की शिकायत मिलती है तो उसे दूर कराया जाता है।