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Kasganj News: गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में बाढ़ के हालात, खेतों और गांवों तक पहुंचा पानी

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फोटो 27 - कछला गंगा घाट पर बढ़ा जलस्तर। स्रोत : संवाद
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कासगंज। नरौरा बैराज से 1.78 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिले में मीडियम फ्लड (मध्यम बाढ़) के हालात बन गए हैं। इस अचानक बढ़े जलस्तर के कारण गंगा का पानी तटवर्ती घाटों और गांवों तक पहुंच गया है। तीर्थनगरी के लहरा गंगाघाट पर कांवड़ मेले के लिए सजाई गई दुकानें पानी में डूब गई हैं। वहीं
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मेले की निगरानी के लिए पुलिस द्वारा बनाया गया वॉच टावर भी बाढ़ के पानी से घिर गया है। गंगा के तटवर्ती गांवों के खादर क्षेत्रों और खेतों में पानी भरने से स्थानीय ग्रामीण बाढ़ की आशंका को लेकर चिंतित होने लगे हैं।
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा में सुबह 8 बजे हरिद्वार से 1.50 लाख क्यूसेक और बिजनौर बैराज से 1.90 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह बना हुआ था। नरौरा बैराज से सुबह के समय यह प्रवाह 1.63 लाख क्यूसेक था, जो दोपहर में बढ़कर 1.78 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। कछला पर गंगा का जलस्तर 162.80 मीटर के निशान पर दर्ज किया गया।
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जिले में बाढ़ का आकलन पानी के प्रवाह से किया जाता है, जहां 1.5 लाख से 2.5 लाख क्यूसेक के बीच का प्रवाह मीडियम फ्लड की श्रेणी में आता है। जिले में इसी स्तर का प्रवाह आ चुका है, जिससे आपदा की स्थिति खड़ी हो गई है।
बढ़े जलस्तर के कारण लहरा और कछला गंगाघाट पर श्रद्धालुओं को स्नान के दौरान भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंगा स्नान के लिए जो खतरे के निशान तय किए गए थे, पानी उन स्थानों से भी ऊपर बहने लगा है, जिसके चलते अब पुनः नए खतरे के बिंदु तय करने होंगे।
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गांवों में पानी की दस्तक और किसानों की चिंता
सोरोंजी इलाके के गांव लहरा, डिंगलेशनगर, दतलाना, बघेला और उढ़ेर के खादर इलाकों में पानी पहुंच चुका है। इसके अलावा सहावर के किलौनी गांव और आसपास के खेतों में भी पानी भर गया है। म्यांसुर के निवासी विमल राघव ने बताया कि किलौनी गांव के खेतों तक पानी आ गया है। यदि जलस्तर और बढ़ा तो आबादी तक भी पानी पहुंच सकता है। दतलाना के हरिओम और उढ़ेर के शंकरपाल ने भी पुष्टि की है कि गांवों के सोता और न्यौली फार्म की ओर पानी बढ़ने से आगामी दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग की टीमों ने बांधों का दौरा शुरू कर दिया है, क्योंकि पानी बढ़ने से कच्चे बांधों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
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सहायता कैंप और दुकानों में घुसा बाढ़ का पानी
सोरोंजी। लहरा घाट पर गंगा का जलस्तर बढ़ने से पालिका की व्यवस्थाएं बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। तीन वाच टावर और हाईमास्ट लाइट टावर पानी में घिर गए हैं। कांवड़ियों के लिए बनाए गए वाटरप्रूफ टेंट, प्रशासनिक कैंप, अस्थायी चेंजिंग रूम और प्रसाधन गृह में भी पानी घुस गया है, जिससे दुकानदारों को अपने तख्त पीछे हटाने पड़े। एसडीएम एवं अधिशासी अधिकारी हर्षिता देवड़ा ने बताया कि पानी बढ़ने के कारण सभी व्यवस्थाएं पीछे हटाने के निर्देश दिए गए हैं। एनडीआरएफ की टीम ने बढ़ते जलस्तर को देखते हुए खतरे के संकेतक (लाल झंडियां) आगे बढ़ा दिए हैं और श्रद्धालुओं को गहरे पानी में स्नान न करने की सलाह दी जा रही है। संवाद
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2013 में आई थी उच्चतम बाढ़
जिले में वर्ष 2013 में 21 जून को बाढ़ आई थी। इस दौरान 21 जून को 6.11 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह बना था। उस समय की आपदा में जिले में काफी क्षति हुई।


जिले में बाढ़ के मानक
- 30 हजार क्यूसेक तक कोई बाढ़ नहीं
- 30 हजार से 1 लाख क्यूसेक तक साधारण बाढ़
- 1 लाख से 1.5 लाख क्यूसेक तक न्यूनतम बाढ़
- 1.5 लाख से 2.5 लाख क्यूसेक तक मध्यम बाढ़
- 2.5 लाख से 3 लाख क्यूसेक तक अधिकतम बाढ़
- 3 लाख से अधिक क्यूसेक तक उच्चतम बाढ़



बैराजों से पानी का प्रवाह
हरिद्वार बैराज से क्यूसेक- 150912 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 190299 क्यूसेक
नरौरा बैराज से - 178712 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.80 मीटर के निशान पर


वर्जन-
गंगा में मीडियम फ्लड की स्थिति बनी हुई है। सिंचाई विभाग अलर्ट पर है। जलस्तर की निगरानी और बांधों की निगरानी टीमों के द्वारा की जा रही है। ग्रामीणों को भी सतर्क रहने को कहा गया है। फिलहाल स्थिति सामान्य है।- जितेंद्र अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई।

फोटो 27 - कछला गंगा घाट पर बढ़ा जलस्तर। स्रोत : संवाद

फोटो 27 - कछला गंगा घाट पर बढ़ा जलस्तर। स्रोत : संवाद

फोटो 27 - कछला गंगा घाट पर बढ़ा जलस्तर। स्रोत : संवाद

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