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Kasganj News: अक्षय तृतीया पर दुर्लभ ग्रह-नक्षत्र संयोग, बढ़ेगा शुभ कार्यों का महत्व

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फोटो 42 कासगंज फोटो ज्योतिषाचार्य भरत राम गौड़। स्रोत: संवाद - फोटो : बहराइच के गल्ला मंडी में गेहूं क्रय केंद्र पर हो रही तौल।
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कासगंज। अक्षय तृतीया इस वर्ष ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत विशेष मानी जा रही है। इस दिन रवि योग, त्रिपुष्कर योग, सौभाग्य योग और आयुष्मान योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि में गोचर कर मालव्य महापुरुष राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। साथ ही गजकेसरी राजयोग का भी संयोग बन रहा है।
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ज्योतिषाचार्य भरत राम गौड़ के अनुसार इस वर्ष अक्षय तृतीया पर कई दुर्लभ और शुभ योगों का संयोग बन रहा है। इससे पर्व का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और अधिक बढ़ गया है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल को सुबह 10:48 बजे होगा। यह तिथि 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे समाप्त होगी। ऐसे दुर्लभ योगों में किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार] अक्षय तृतीया पर किया गया दान-पुण्य, जप-तप और पूजा का फल अक्षय होता है। यानी उसका कभी क्षय नहीं होता। इसी कारण इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसे सतयुग और त्रेतायुग के आरंभ से भी जोड़ा जाता है। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण का पांडवों को दिया गया अक्षय पात्र भी इस दिन की महिमा से जुड़ा माना जाता है।
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इस तरह करें पूजा
चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले कलश स्थापना कर भगवान का आह्वान करें। गंगाजल से स्नान कराएं या जल का छिड़काव करें। फिर चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान को पीले वस्त्र, फल, मिठाई, विशेष रूप से खीर या सत्तू का भोग लगाएं। मंत्र का जप करें और माता लक्ष्मी की आरती उतारें।
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सोना खरीदने का शुभ समय
19 अप्रैल-शुभ मुहूर्त- सुबह 10:49 से 20 अप्रैल को सुबह 05:51 बजे तक
20 अप्रैल- अमृत मुहूर्त- दोपहर 02:26 से 03:52 बजे तक
20 अप्रैल-विजय मुहूर्त- दोपहर 02:30 से 03:22 बजे तक
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