कासगंज। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ पाने के लिए करीब 20 हजार किसान आज भी तरस रहे हैं। पोर्टल पर 2.30 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण होने के बावजूद महज 2.10 लाख किसानों के खातों तक ही योजना की किस्त पहुंच पा रही है।
महीनों से कृषि विभाग के चक्कर काट रहे इन किसानों की शिकायतों का अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है, जिससे ग्रामीण अंचल में गहराता रोष साफ तौर पर देखा जा सकता है। केंद्र सरकार ने 1 दिसंबर 2018 को देश के किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी।
इसके तहत पात्र किसानों के खातों में सालाना छह हजार रुपये की राशि दो-दो हजार की तीन समान किस्तों में भेजी जाती है। कार्यालय पहुंचने वाले किसानों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी हर बार कभी तकनीकी त्रुटि तो कभी सर्वर फेल होने का बहाना बनाकर उन्हें लौटा देते हैं।
कई किसान ऐसे हैं जिन्हें पहले किस्तें मिलती रहीं लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया। वहीं कुछ किसानों को आवेदन के वर्षों बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
भुगतान नहीं हो रहा
करीब पांच साल पहले आवेदन किया था लेकिन अभी तक सम्मान निधि नहीं मिली। लगातार विभागीय कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।- सूबेदार सिंह किसान
सम्मान निधि की 18 किस्तें मिलने के बाद भुगतान बंद हो गया। इसके बाद कई बार कार्यालय में जानकारी की लेकिन सर्वर बंद होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया गया। -जगदीश, किसान
वर्जन
ग्रामीण बैकों के मर्ज होने से जिन किसानों ने एनपीसीआई नहीं कराई है उनके खाते में सम्मान निधि रुक गई थी। इसके अलावा ई-केवाईसी न कराने वाले किसानों के लिए योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। किसान अपनी प्रक्रिया पूरी करा लें ताकि लाभ मिल सके। - महेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक
फोटो 06 कासगंज फोटो सूबेदार किसान। स्रोत: संवाद
फोटो 06 कासगंज फोटो सूबेदार किसान। स्रोत: संवाद