कासगंज। सोमवार तड़के जब अधिकांश लोग नींद के आगोश में थे अचानक आई आंधी-बारिश ने जितेश-नीलम के परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। लिंटर गिरने से मलबे में पूरा परिवार दब गया। परिवार में सिर्फ मां-बाप और बुआ बचे हैं, आंधी-बारिश से बरपे कहर ने उनके कलेजे के टुकड़ों को उनसे हमेशा के लिए जुदा कर दिया।
जितेश और नीलम अपने बच्चों और बहन के साथ कमरे में सो रहे थे, तभी अचानक मकान का लिंटर भरभराकर गिर पड़ा कुछ ही सेकंड में पूरा कमरा मलबे में तब्दील हो गया और परिवार के सभी सदस्य उसके नीचे दब गए। हादसे के बाद मची चीख-पुकार ने आसपास के लोगों को जगा दिया। ग्रामीणों ने बिना कुछ सोचे-समझे मौके की ओर दौड़ लगा दी और अपने हाथों से मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालना शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद सभी घायलों को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने मासूम बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सोनाली और अविनाश जिंदगी की जंग हार गए।
बच्चों की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस घर में कुछ समय पहले तक बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं। हर कोई यही कह रहा है कि एक ही पल में सब कुछ खत्म हो गया। बच्चों के दादा विनोद बच्चों के शव के साथ पोस्टमार्टम घर पहुंचे। बच्चों की मौत से उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।