कासगंज। गंजडुंडवारा क्षेत्र में मासूम बच्ची की हत्या के सात दिन बाद भी पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लग सका है। 6 जून को घर के बाहर से लापता हुई बच्ची का शव 9 जून की सुबह गांव से करीब 250 मीटर दूर मक्का के खेत में मिला था। घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था, लेकिन एक सप्ताह बाद भी हत्यारोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इससे पीड़ित परिवार में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
गंजडुंडवारा थाना क्षेत्र के एक गांव में 6 जून की शाम घर के बाहर खेल रही बच्ची अचानक लापता हो गई थी। परिजन ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। तीन दिन बाद 9 जून की सुबह गांव के समीप मक्का के खेत में बच्ची का शव पुलिस ने बरामद किया। पुलिस ने बच्ची की हत्या के मामले में जांच शुरू की, लेकिन सात दिन बीतने के बाद भी मामले का खुलासा नहीं हो सका है।
घटना के बाद पुलिस ने सर्विलांस, एसओजी और पुलिस की कई टीमें जांच में लगाई हैं। संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है और तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने गांव के तीन लोगों के डीएनए नमूने भी लिए हैं। मासूम की हत्या के खुलासे में हो रही देरी से परिजन खुदी हैं। मासूम की हत्या को सात बीत गए , लेकिन अब तक आरोपी का पता नहीं चल सका है। पीड़ित परिवार को राजनैतिक संगठन व समाज के लोग ढांढस बंधाने के लिए पहुंच रहे हैं। पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि बच्ची की हत्या के मामले की जांच की जा रही है। अभी तक कोई ठोस साक्ष्य हाथ नहीं लगा है, लेकिन पुलिस टीमें लगातार काम कर रही हैं।
पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे वाल्मीकि समाज के लोग
कासगंज। गंजडुंडवारा क्षेत्र के एक गांव में अनुसूचित जाति की बच्ची का 9 जून की सुबह मक्का के खेत में हत्या कर शव फेंक दिया। कासगंज से राकेश बाबू वाल्मीकि,सोनू भंडारी,मोहित तेजधारी,दीपक वाल्मीकि, मुकेश वाल्मीकि, सुनील सभासद सहित अन्य लोग सोमवार को गांव में पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को मदद का भरोसा दिलाया। इसके बाद उन्होंने पटियाली सीओ मुलाकात की और बच्ची के हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। सोनू भंडारी ने बताया कि जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर प्रदेश में कामबंद हड़ताल की जाएगी।