फोटो37कासगंज में मनरेगा योजना में काम करते मजदूर। स्रोत:विभाग
कासगंज। मनरेगा योजना में दिव्यांगजन को रोजगार देने में भले ही प्राथमिकता का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। जिले में मनरेगा योजना से जुड़े 829 दिव्यांग जॉब कार्ड धारक हैं। इनमें से केवल 36 प्रतिशत को ही रोजगार मिल पाया। 100 दिनों का रोजगार तो दूर, कई दिव्यांग मजदूर साल भर में कुछ दिन काम पाने के लिए भी तरसते हैं। वहीं काम करने के बाद उन्हें भुगतान के लिए कई दिन इंतजार करना पड़ता है। इससे उन्हें परिवार के पालन पोषण में दिक्कत हो रही हैं।
जिले में 423 ग्राम पंचायतें है। इनमें मनरेगा श्रमिकों के करीब 1,15,118 जॉब कार्ड धारक परिवार है। वहीं 829 दिव्यांग जॉब कार्ड धारक भी हैं। इनमें से 326 दिव्यांगों को औसतन 36 दिन ही काम मिला है। ग्राम पंचायतों में काम के लिए उन्हें लगातार चक्कर लगाने पड़ते हैं। मनरेगा योजना में विशेष श्रेणी के मजदूरों को प्राथमिकता देने के निर्देश के बावजूद स्थानीय स्तर पर उन्हें समय पर काम नहीं मिल पाता है। काम करने के बाद उन्हें काफी दिनों तक मजदूरी के रुपये के लिए इंतजार करना पड़ता है। समय पर मजदूरी न मिलने पर उनके सामने परिवार का पालन पोषण करने की समस्या रहती है। इससे उन्हें योजना से हटकर काम की तलाश में अन्य स्थान पर मजदूरी के लिए जाना पड़ता है। अधिकारी भले ही दिव्यांगों को 100 दिन का रोजगार मिलने का दावा करतें हो, लेकिन जिले की किसी भी ग्राम पंचायत में एक भी दिव्यांग जॉब कार्ड धारक 100 दिन के रोजगार के लिए तरसते हैं। मुख्य विकास अधिकारी, वीरेंद्र सिंह ने बताया कि मनरेगा योजना में काम करने वाले इच्छुक जॉब कार्ड धारक को समय पर रोजगार दिया जाता है। शासन से धनराशि आने पर समय-समय पर मजदूरों का ऑनलाइन भुगतान उनके खाते में किया जाता है।