कासगंज। जिले में भूजल का अंधाधुंध दोहन चिंता का विषय बना हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप जिलेभर में भूजल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। नदियों और नहरों की मौजूदगी के बावजूद, भूजल की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जो न केवल पृथ्वी की सेहत के लिए बल्कि क्षेत्र के भविष्य के लिए भी एक बड़ा खतरा है। भूजल के अत्यधिक दोहन के साथ-साथ रासायनिक खादों का बढ़ता प्रयोग और हरे-भरे पेड़ों का कटान भी इस समस्या को और गहरा रहा है।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो कासगंज जिले के विभिन्न इलाकों में भूजल स्तर में 10 से 15 फीट तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट एक गंभीर चेतावनी है, लेकिन दुर्भाग्यवश, लोग अभी भी जल के दोहन से बाज नहीं आ रहे हैं। घरों में सबमर्सिबल पंपों की बढ़ती संख्या ने इस दोहन को और बढ़ावा दिया है।
खेती-किसानी में आधुनिक सिंचाई पद्धतियों का अभाव भी भूजल की कमी का एक प्रमुख कारण है। किसान आज भी पारंपरिक तरीकों से सिंचाई कर रहे हैं, जिनमें अत्यधिक पानी की खपत होती है। जहां पहले किसान सरकारी नलकूपों और अन्य ग्रामीण नलकूपों पर सिंचाई के लिए निर्भर रहते थे, वहीं अब उन्होंने अपने खेतों में भी सबमर्सिबल पंप लगवा लिए हैं, जिससे भूजल पर दबाव और बढ़ गया है।
भूजल की स्थिति पर बोले कारोबारी
कासगंज। जिले के अलग-अलग नल और नलकूप कारोबारियों से बातचीत की गई तो भूजल की स्थिति के आंकड़े चौकाने वाले सामने आए। गंजडुंडवारा के कारोबारी महेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि पांच साल पहले 40 फीट पर नल का बोरिंग होता था, लेकिन अब यह बोरिंग 60 फीट पर हो रहा है। वहीं पटियाली निवासी राजू श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में काफी गिरावट भूजल स्तर में आई है। पहले 20 फीट के बोरिंग पर नल में पानी आ जाता था, लेकिन अब 40 फीट की बोरिंग पर पानी मिल रहा है। कासगंज शहर के कारोबारी धर्मेंद्र ने बताया कि करीब 10 वर्ष पूर्व 30 से 35 फीट पर नल के लिए पानी मिल जाता था, लेकिन अब पानी 40 से 45 फीट पर मिल रहा है। संवाद
फोरलेन और हाईवे निर्माण के लिए काटे 6000 पेड़
कासगंज। पिछले 5-6 वर्षों में फोरलेन और हाईवे निर्माण के कारण पेड़ों का कटान किया गया। जिले में अब तक सड़क किनारे लगे 6000 घने विशाल पेड़ कट चुके हैं। इससे जिले का हरित क्षेत्रफल प्रभावित हुआ। वन विभाग की ओर से पौधरोपण भी किया गया है लेकिन अभी रोपित पौधे बड़े वृक्ष के आकार में नहीं पनप सके हैं, जिससे फोरलेन सड़क और हाईवे के किनारे हरियाली नजर नहीं आती। यह स्थिति पृथ्वी की सेहत को खराब कर रही है। संवाद
वर्जन-
- पृथ्वी की सेहत सुधारने के लिए हर किसी को जागरूक होना पड़ेगा। गिरता भूजल स्तर चिंता का विषय है। लोग जल दोहन को रोकें। खेतों की सिंचाई में आधुनिक पद्धतियों का इस्तेमाल करें। प्राकृतिक खेती से लोग जुड़ें। इससे पृथ्वी की सेहत सुधर सकेगी- विकास रंजन चौधरी , प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र
फोटो 47 कासगंज में एक खेत में पंप से पानी लगाता किसान। स्रोत: फाइल फोटो