फोटो 01कासगंज के नदरई गेट बाजार में ठेला पर बिक्री के लिए रखे पकौडे़। संवाद
कासगंज। अगर आप चटपटे खाने के शौकीन हैं और शाम को कुछ तीखा हो जाए के मूड में घर से निकल रहे हैं, तो जरा संभलकर! आपकी जेब पर महंगाई की लाल मिर्च लगने वाली है। अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध की तपिश अब शहर के गोलगप्पों से छोले-भटूरे की कड़ाही तक पहुंच गई है। एलपीजी सिलेंडर की किल्लत का स्पष्ट असर स्ट्रीट फूड मार्केट पर नजर आ रहा है। छोटे दुकानदार और ठेले वालों को जहां व्यंजन के लिए अतिरिक्त लागत चुकानी पड़ रही है, जिसका सीधा असर उपभोक्ता की प्लेट पर नजर आ रहा है।
एलपीजी सिलिंडर की किल्लत से बाजार में इकोनॉमिक इमरजेंसी जैसे हालात बन गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे खाद्य व्यवसायियों को हो रही है। एक ओर ठेल और ढाबा संचालकों को महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है। नतीजा उपभोक्ताओं को अपने स्वाद के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। वहीं जिन व्यापारियों ने कीमत नहीं बढ़ाई है, उन्होंने प्लेट की मात्रा में सेंध लगा दी है। व्यापारियों के अनुसार पहले की तुलना में अब सिलिंडर की उपलब्धता कम हो गई है और कई बार अधिक कीमत पर गैस खरीदनी पड़ रही है। इसलिए लागत निकालने के लिए खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ाए हैं। विक्रेता गुलाब सिंह ने बताया सिलिंडर अब 200 से 300 रुपये महंगा पड़ रहा है। इसलिए समोसे की कीमतें बढ़ाई गई हैं। वहीं प्रदीप कुमार ने कहा कि चाऊमीन की कीमत नहीं बढ़ाई, लेकिन प्लेट की मात्रा घटा दी गई है। शिवम ने बताया कि गोलगप्पे की प्लेट में संख्या कम कर दी गई है और सूजी वाले गोलगप्पे बनाना बंद कर दिए हैं। महेश ने कहा कि सरसों का तेल पहले से ही महंगा हो गया था। अब सिलिंडर के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है, इसलिए पकौड़े की कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं।
कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है:
पकोड़े: पहले 100 ग्राम के लिए 20 रुपये - अब 25 रुपये
समोसा: पहले 2 नग 15 रुपये - अब 20 रुपये
गोलगप्पे: पहले 5 नग 10 रुपये- अब 4 नग 10 रुपये
छोले-भटूरे प्लेट: पहले 25 रुपये -अब 30 रुपये
नॉन प्लेट: पहले 30 रुपये - अब 40 रुपये