कासगंज। जर्जर इमारतें, दरकती छतें और नीचे से गुजरते बेखबर राहगीर। शहर में कई जगह खड़ी खस्ताहाल इमारतें सीधे माैत को दावत दे रही हैं। कई घनी आबादी वाले और व्यस्त क्षेत्रों में पुराने मकान अपनी अंतिम सांसें गिन रहे हैं। अगर वक्त रहते इन्हें नहीं ढहाया गया तो किसाी भी दिन बढ़ा हादसा हो सकता है।
बारिश के मौसम में इन कमजोर और दरकती छतों वाले भवनों के ढहने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। दिल्ली के शांति निकेतन इलाके में हाल ही में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद भी स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका इस ओर से आंखें मूंदे बैठी है।
सूत की मंडी और मोहल्ला नाथूराम में दिनभर लोगों का भारी आवागमन रहता है। स्टेट बैंक कॉलोनी, गली सत्तार बैंड, और मोहल्ला जय-जय राम में खस्ताहाल मकानों की दीवारें और छज्जे कभी भी नीचे गिर सकते हैं।
जामा मस्जिद क्षेत्र में एक जर्जर मकान का आधा हिस्सा पहले ही गिर चुका है और शेष हिस्सा भी ढहने की कगार पर है। इस मार्ग से सदर तहसील, सीओ कार्यालय और चकबंदी कार्यालय जाने वाले आम नागरिकों का रोजाना तांता लगा रहता है।
इसके अलावा सीएमएओ कार्यालय के सामने स्थित जर्जर भवन, जिसके पास आए दिन बच्चे खेलते रहते हैं। हालांकि नगर पालिका कर्मी सर्वे का दावा कर रहे हैं लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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अमांपुर बाजार में भी हालात चिंताजनक
शहर ही नहीं बल्कि अमांपुर के मुख्य बाजार में भी एक गिरासू भवन इसी तरह हादसे को दावत दे रहा है। बाजार की व्यस्त गतिविधियों के बीच यह जर्जर ढांचा खरीदारों और दुकानदारों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। यदि समय रहते ऐसे सभी भवनों को चिह्नित कर उन्हें गिराया नहीं गया, तो किसी बड़ी अनहोनी को टालना नामुमकिन होगा। सभासद अभिषेक यादव ने और नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की है।
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वर्जन
नगर पालिका प्रशासन की ओर से जेई व सुपर वाइजर को जर्जर भवनों के सर्वे के निर्देश दिए गए हैं। सभासदों से जर्जर भवन के बारे में सूचना मांगी गई थी। पूर्व में तीन जर्जर भवनों की सूचना एसडीएम कार्यालय को भी भेजी गई है। लोगों से अपील है कि आसपास कोई भवन जर्जर है या उसके गिरने की आशंका है तो इसकी सूचना तत्काल पालिका कार्यालय को दें। -विवेक त्रिपाठी, ईओ नगर पालिका कासगंज