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Kasganj News: निजी अस्पतालों में बढ़ रहा सिजेरियन प्रसव

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कासगंज। जिले के निजी अस्पतालों में नॉर्मल डिलीवरी अब अपवाद बनती जा रही है और ऑपरेशन से प्रसव का तरीका तेजी से हावी हो रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-6 के ताजा आंकड़ों ने निजी और सरकारी अस्पतालों के बीच का बड़ा फर्क उजागर कर दिया है।
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वर्ष 2023-24 के लिए एनएफएचएस-6 की जिलेवार रिपोर्ट जारी की गई है। इसकी वर्ष 2019-21 के लिए जारी एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट से तुलना की गई है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अस्पतालों में होने वाले प्रसव का आंकड़ा 74.8 से बढ़कर 85.9 फीसदी पहुंच गया है। निजी अस्पतालों में प्रसव का आंकड़ा भी 46.6 से 53.7 फीसदी हो गया है। इस दौरान निजी अस्पतालों में 26.1 प्रतिशत प्रसव ऑपरेशन से हुए। एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 19.9 फीसदी था।



निजी और सरकारी अस्पतालों में हुए सिजेरियन प्रसव की तुलना में बड़ा अंतर मिला है। निजी अस्पतालों में 26.1 और सरकारी में 1.8 फीसदी सिजेरियन प्रसव हुए। एनएफएचएस-5 में सरकारी अस्पतालों में 1.9 और निजी अस्पतालों में 19.9 फीसदी प्रसव सिजेरियन हुए थे। इस लिहाज से सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन की दर कम हुई और निजी में 6.2 फीसदी बढ़ गई।
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सिजेरियन में संक्रमण का खतरा रहता है
जिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नब्बीला अब्बासी के मुताबिक, सामान्य प्रसव महिला के लिए बेहतर रहता है। विशेष परिस्थिति में ऑपरेशन करना चाहिए। इससे महिला को कमजोरी, संक्रमण होने का खतरा रहता है। सामान्य प्रसव की तुलना में सिजेरियन के बाद महिला को ठीक होने में 4 से 6 हफ्ते का समय लगता है। टांकों के कारण उठने-बैठने और दैनिक कार्यों में असुविधा होती है। ऑपरेशन के बाद महिला के पेट का आकार सामान्य प्रसव की तुलना में काफी बढ़ जाता है। हालांकि, सिजेरियन के चलन से बीते कुछ वर्षों में जच्चा-बच्चा की मृत्यु दर में गिरावट आई है।
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वर्जन
निजी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव के मामले बढ़ने के कारणों की जानकारी कराई जाएगी। सरकारी अस्पतालों में सामान्य प्रसव कराने पर ही फोकस रहता है। - डाॅ. अजय कुमार, सीएमओ
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