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Kasganj News: मौसम के मिजाज ने बिगाड़ी आम की पैदावार

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फोटो26कासगंज आम के पेड पर लगा बौंर । संवाद
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मोहनपुरा। इस साल आम के शौकीनों को मायूसी हाथ लग सकती है। मौसम के बदलते मिजाज के कारण आम की पैदावार में भारी गिरावट आने की आशंका है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि फरवरी-मार्च के महीने में अचानक मौसम में उतार-चढ़ाव ने आम के बौर (फूल) पर सीधा असर डाला है। फरवरी में तापमान अचानक बढ़ने से पेड़ों पर बौर के बजाय पत्तियों में अधिक वृद्धि हुई। इसके कारण अन्य वर्षों की तुलना में इस बार बौर बहुत कम आया है। उन्होंने कासगंज और सहावर क्षेत्र में बागों का जायजा लिया। उनके अनुसार, इस साल आम का उत्पादन 20 से 40 फीसदी तक कम हो सकता है।
डॉ. भदौरिया ने बताया कि बौर कम आने के साथ-साथ पेड़ों में गमोसिस और स्टेम बोरर जैसे कीटों का प्रकोप भी देखा गया है। यह भी आम की पैदावार को प्रभावित कर रहा है। बागवानों को नियमित निगरानी बनाए रखने की सलाह दी है। इससे कीटों के प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकेगा।
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पिछले वर्ष जनपद में आम उत्पादन के आंकड़े
वर्ष - 2025-26
क्षेत्रफल - 1715 हेक्टेयर
उत्पादन - 257250 क्विंटल

फलों को बचाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह
डॉ. अंकित सिंह भदौरिया ने बताया कि पेड़ों पर अब छोटे-छोटे फल बनने शुरू हो गए हैं। इन्हें बचाने और बौर को मजबूती देने के लिए बागवान 1 मिली प्लानॉफिक्स को 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। साथ ही 20% बोरॉन (2 ग्राम प्रति लीटर) का भी इस्तेमाल करें। इसके अलावा नेप्थलीन एसिटिक एसिड (1 मिली दवा 5 लीटर पानी में) का छिड़काव फायदेमंद है। भुनगा कीट के लिए इमिडाक्लोप्रिड और खर्रा रोग के लिए सल्फर या हेक्साकोनाजोल का उपयोग करें। पेड़ों के नीचे पुराने पत्तों और सूखे बौर को साफ करें और हल्की गुड़ाई करें ताकि मिट्टी में हवा जा सके।

सावधानियां
-दवाओं का छिड़काव हमेशा शाम के समय ही करें।
-धूप में छिड़काव करने से पत्तियां झुलस सकती हैं।
-दवाओं का प्रयोग हमेशा विशेषज्ञ से पूछकर करें।
-समय-समय पर बाग की निगरानी करें
-किसी भी समस्या पर विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
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