कासगंज। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाने वाला श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार अत्यंत विशेष और फलदायी रहने वाला है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष द्वापर युग जैसा दुर्लभ महासंयोग बन रहा है जहां 15 साल बाद अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का अद्भुत मेल हो रहा है।
ज्योतिषाचार्य भरतराम गौड़ ने बताया कि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस पावन अवसर पर चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और हर्षण योग का शुभ महासंयोग भी बन रहा है।
ज्ञान और भाग्य के दाता गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित होकर नवग्रह मंडल को अलौकिक ऊर्जा प्रदान करेंगे। इसके साथ ही आत्मा के कारक सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में और दैत्य गुरु शुक्र अपनी स्वराशि तुला में विराजेंगे। वहीं मंगल और शुक्र के बीच बन रहा ''नवपंचम राजयोग'' धन, वैभव और ऐश्वर्य में अप्रत्याशित वृद्धि के द्वार खोलेगा। साथ ही इस दिन हंस महापुरुष राजयोग, मालव्य महापुरुष राजयोग और बुधादित्य राजयोग बन रहे हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त : 4 सितंबर की रात 11:56 बजे से 5 सितंबर रात 12:41 बजे तक
पूजन विधि :
प्रातः काल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।
चौकी पर बाल गोपाल को स्थापित कर गंगाजल, पंचामृत व शुद्ध जल से स्नान कराएं।
नए वस्त्र पहनाकर चंदन, अक्षत, पुष्प व तुलसी दल अर्पित करें।
माखन-मिश्री, फल व सात्विक पकवानों का भोग लगाएं।
धूप-दीप जलाकर ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
रात 12 बजे शंख-घंटियां बजाकर आरती करें, कान्हा को झूला झुलाएं और प्रसाद बांटकर व्रत का पारण करें।