कासगंज। बदलती जीवनशैली, खान-पान की बिगड़ी आदतों और बढ़ते तनाव का सबसे बुरा असर लोगों के दिल पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल में हर महीने हृदय रोग से जुड़ी जांचों के लिए हजारों मरीज पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक, पहले हृदय रोग मुख्य रूप से बुजुर्गों की समस्या माने जाते थे। वर्तमान में 30 से 45 वर्ष के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अत्यधिक तैलीय भोजन, व्यायाम न करना, धूम्रपान और मानसिक तनाव इसके मुख्य कारण हैं।
हृदयघात की स्थिति में समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल में हृदयघात के मरीजों के लिए ''टेनेक्टाप्लेस'' इंजेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जो चिकित्सकीय जांच और मरीज की स्थिति के आधार पर लगाई जाती है।
अब तक इस जीवनरक्षक सुविधा का लाभ कई मरीजों को मिल चुका है, जिनमें संध्या देवी (58), प्रेम सिंह (65), खूब सिंह (60), विशाल (44), मामुद्दीन (45), लोंग श्री (70) और मीरा देवी जैन (75) शामिल हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और नियमित व्यायाम करके इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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जिला अस्पताल में एक माह में होने वाली जांचों की संख्या
ईसीजी- 1200
लिपिड प्रोफाइल- 1000
सीआरपी - 1000
सीपीके-एमबी - 800
ट्रोपोनिन-टी - 25
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- सीने में दर्द या भारीपन
- सांस फूलना
- हाथ, कंधे या जबड़े में दर्द
- अचानक पसीना आना
- चक्कर आना या कमजोरी महसूस होना
- धड़कन तेज या अनियमित होना
- बिना किसी कारण बहुत ज्यादा थकान होना
ऐसे रखें हृदय को स्वस्थ
फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं
ज्यादा नमक, चीनी और तले हुए भोजन का सेवन न करें
नियमित रूप से पैदल चलें या व्यायाम करें
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन न करें
रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच करवाते रहें
तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें
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वर्जन
जिला अस्पताल में जांच और शुरुआती इलाज (टेनेक्टाप्लेस इंजेक्शन आदि) की सुविधा उपलब्ध है। सही समय पर सतर्कता और दिनचर्या में सुधार कर दिल के दौरे के खतरे से बचा जा सकता है। - डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस