कासगंज। गौ पालन का क्रेज नगर क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी घट रहा है। आंकड़ों में करीब 25 फीसदी गौवंशीय पशुओं की संख्या कम हो गई है। गौवंशीय पशुओं की घटती संख्या चिंता का कारण है। नगर व ग्रामीण इलाकों में रसोई में सबसे पहले गाय की रोटी बनाने की पुरानी परंपरा है, लेकिन यह रोटी बनाने की पंरपरा तो आज भी कायम है। मुश्किल इस बात की है कि लोगों को यह रोटी खिलाने को गाय मुश्किल से मिल पाती है।
रसोई की सबसे पहली रोटी गाय को खिलाने की परंपरा के पीछे माना जाता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है और पहली रोटी गाय को खिलाने से 33 करोड़ देवी देवताओं का भोग लग जाता है। मकानों की बनावट के पैमाने बदलने व खेती में आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग होने के कारण गायों व गौवंश की उपयोगिता कम हुई है। शहरों में जगह का अभाव पैदा हुआ है, जिसके चलते लोग चाहकर भी गौ पालन नहीं कर पाते, वहीं गांव में गौ पालन इसलिए नहीं होता कि गौंवश पशुओं का खेती में उपयोग नहीं है। गाय की उपयोगिता घर परिवार के लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि गौपालन से जहां शुद्ध दूध की उपलब्धता होती है वहीं दूध से बने घी मक्खन, दही छाछ इत्यादि प्राप्त होता है। यहां तक कि गाय का गोबर और मूत्र भी औषधी प्रयोग में आता है। इन खूबियों के बावजूद गौ पालन में गिरावट एक चिंता का विषय है।
पशु चिकित्सा विभाग के आंकड़े गौवंश पशुओं की संख्या में कमी आने की गवाही दे रहे हैं। पांच वर्ष पूर्व पंचवर्षीय गणना के अंतर्गत गौवंश पशुओं की गणना की गई तो यह आंकड़ा कभी 2 लाख के आसपास था, लेकिन पिछले वर्ष हुई गणना में यह आंकड़ा 1.50 लाख पर सिमट कर रह गया। पशु चिकित्सक भूपेंद्र कुमार का कहना है कि गौवंश पशुओं की संख्या में लगातार कमी हो रही है उसका प्रमुख कारण है कि गौंवश पशुओं की उपयोगिता अब खेती कार्यों में नहीं रही है पशुपालन महंगा होता जा रहा है। गौवंश पशुओं की तस्करी का खेल है जारी। गौवंश पशुओं की तस्करी का खेल लगातार चल रहा है। बड़ी संख्या में लोग गौवंश पशुओं के कारोबार से जुड़े हैं। आए दिन पुलिस के द्वारा गौवंश पशुओं की बरामदगी की जाती है। पुलिस इस पर रोक नहीं लगा पा रही है। तस्कर नए नए तरीकों से पशुओं की तस्करी के कार्य को अंजाम देते है। कासगंज से होकर बड़ी संख्या में पशुओं को बदायूं मुरादाबाद की ओर ले जाने का सिलसिला चलता है, लेकिन यह सिलसिला पुलिस की सक्रियता के चलते थमा तो तस्करों ने ट्रक में लादकर तस्करी को पशुओं को ले जाया जाने लगे। जब पुलिस ने इसका भी भंडाफोड़ कर दिया तो सीमा बदलकर तस्कर बदायूं की ओर तस्करी को पशु ले जा रहे है। कट्टी खाने में गौवंश पशुओं का वध करके उनके मांस का निर्यात किया जाता है।