हरदोई में जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल बुधवार आधी रात से खत्म हो गया। चुनाव कार्यक्रम जारी न होने के कारण 28 साल बाद एक बार फिर जिला पंचायत की कमान डीएम के हाथ में पहुंच गई है। डीएम अविनाश कुमार अब जिला पंचायत के प्रशासक होंगे।
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इससे पहले वर्ष 1992 में तत्कालीन डीएम नीरज कुमार गुप्ता जिला पंचायत के प्रशासक बने थे। अभी तक पंचायत चुनावों की तारीख की घोषणा नहीं हो पाई है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर की आधी रात से खत्म हो चुका है। जिले के सभी 19 विकास खंडों में प्रशासक बनाए जा चुके हैं।
बुधवार रात 12 बजे जिला पंचायत के चालू सदन का भी कार्यकाल खत्म हो गया। शासन के निर्देशों के मुताबिक डीएम को जिला पंचायत का प्रशासक बनाया गया है। नए जिला पंचायत अध्यक्ष के निर्वाचन होने तक डीएम ही जिला पंचायत के प्रशासक रहेंगे।
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इससे पहले 19 नवंबर 1992 से 11 दिसंबर 1992 तक तत्कालीन डीएम नीरज कुमार गुप्ता प्रशासक बने थे। इसके बाद से जिला पंचायत को कभी पूर्णकालिक तो कभी कार्यवाहक अध्यक्ष मिलता रहा, लेकिन प्रशासक बनाए जाने की स्थिति 28 साल एक माह दो दिन बाद आई है। इससे पहले भी 16 डीएम प्रशासक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
ये डीएम रह चुके प्रशासक
जिले में डीएम रहे काजी मुख्तार अहमद, एम वर्दराजन, जितेंद्र नाथ रंजन, हृदय नारायण श्रीवास्तव, नृपेंद्र मिश्र, आरएन मिश्र, हरिमोहन सिंह, आरपी सिन्हा, आरबी भास्कर, एचएल विरदी, डॉ. परमानंद मिश्र, रामशरण श्रीवास्तव, सिराज हुसैन, एसपी सक्सेना, एमपी जैन और नीरज कुमार गुप्ता भी जिला पंचायत के प्रशासक रह चुके हैं।
अब तक ये रहे जिला पंचायत अध्यक्ष
मुनेश्वर बख्स सिंह, निरंजन सिंह देव, रघुनंदन शर्मा, श्रीशचंद्र अग्रवाल, महेश सिंह, मोहनलाल वर्मा, राजेश्वरी देवी, अनीता वर्मा, मुकेश अग्रवाल, कामिनी अग्रवाल और मीरा अग्रवाल जिला पंचायत की निर्वाचित अध्यक्ष रही हैं। इनमें श्रीशचंद्र अग्रवाल और मुकेश अग्रवाल दो-दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहे हैं। शिव कुमार त्रिपाठी, बृजराज किशोर दीक्षित और डॉ. शैलेंद्र कुमार द्विवेदी कार्यवाहक अध्यक्ष रहे हैं। बृजराज किशोर दीक्षित दो बार कार्यवाहक अध्यक्ष रहे।
दो दशक से मुकेश अग्रवाल के हाथ ही रही सत्ता
कद्दावर नेता नरेश अग्रवाल के छोटे भाई मुकेश अग्रवाल ही दो दशक से जिला पंचायत की बागडोर संभाले हैं। कभी प्रत्यक्ष तो कभी अप्रत्यक्ष रूप से जिला पंचायत की सत्ता मुकेश अग्रवाल के हाथों में ही रही। वर्ष 2000 और 2005 में मुकेश अग्रवाल जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
वर्ष 2010 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित होने पर मुकेश अग्रवाल की पत्नी कामिनी अग्रवाल अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। 2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुआ, तो मुकेश अग्रवाल ने अपनी करीबी मीरा अग्रवाल को इस पद पर निर्विरोध निर्वाचित कराया। मुकेश अग्रवाल खुद 2000 से लगातार जिला पंचायत सदस्य हैं। इससे पहले मुकेश अग्रवाल के पिता श्रीशचंद्र अग्रवाल वर्ष 1963 से वर्ष 1968 तक और 1989 से 1990 तक जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे थे।
दो दशक में खूब कराया विकास: मुकेश
जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2000 में जब पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली थी, तो ग्रामीण इलाके काफी पिछड़े थे। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशक में शासन से मिले बजट का सदुपयोग करते हुए ग्रामीण अंचलों में मार्गों का जाल बिछ गया तो आवश्यक स्थानों पर पुल पुलियों का निर्माण भी हुआ।
बड़ी संख्या में परिषदीय विद्यालयों की स्थापना हुई। इस कार्यकाल में भी जिला पंचायत के सभागार को उच्चीकृत कराया गया है और जिले में सबसे ऊंचा तिरंगा जो कि 101 फिट का है, जिला पंचायत परिसर में लहरा रहा है।