कानपुर में जीका रोगी के संक्रमण के स्रोत की तलाश अब आस्ट्रेलिया का उदाहरण लेकर मंकी बाइट में की जा रही है। यह पता चला है कि बंदरों के काटने से भी जीका का संक्रमण मनुष्य में आ सकता है। फिर मच्छर के काटने या संक्रमित का खून चढ़ने से दूसरे में संक्रमण जा सकता है।
असुरक्षित यौन संबंधों से भी जीका का संक्रमण फैलता है। हैलट, उर्सला, कांशीराम अस्पताल के अलावा सीएचसी में भी बंदर काटने के मामले पता किए जा रहे हैं। अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जीके मिश्रा ने बताया कि आस्ट्रेलिया में कुछ ऐसे उदाहरण मिले हैं। वहां जो रोगी जीका पॉजिटिव आए हैं, उन्हें बंदर ने काटा था।
इसी आधार पर सीएमओ की ओर से हैलट, उर्सला, कांशीराम अस्पताल, सीएचसी से मंकी बाइट का ब्यौरा लिया जा रहा है। इसके साथ ही कोरोना रोगियों की तरह बुखार के रोगियों का संपर्क नंबर और पता आदि लिया जा रहा है। पोखरपुर के आसपास जिन लोगों को बंदर ने काटा है, उनके सैंपल भी जांच के लिए भेजे जाएंगे।
सर्वे टीम में स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल
पोखरपुर में घर-घर सर्वे कर रही 70 टीमों में स्त्री रोग विशेषज्ञ को भी शामिल किया गया है। स्त्री रोग विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं की जांच करेंगी। इसके साथ ही बुखार की हिस्ट्री ली जाएगी। जाजमऊ, चकेरी बीमा अस्पतालों के प्रबंधन से बुखार रोगियों का ब्यौरा दर्ज करने के लिए कहा गया है। जीका संक्रमित घर पहुंची दिल्ली, लखनऊ की टीम ने रोगी पूरे घर की जांच की। चार किमी क्षेत्र के कुल 55 हजार घरों का सर्वे किया जाना है।