लाल इमली के पास रहने वाली यशोदा एक नामी वेलनेस सेंटर में काम करती थीं। लॉकडाउन लागू हुआ तो सेंटर बंद हो गया। दो महीने की बंदी के दौरान उनकी नौकरी चली गई। यशोदा ने मिशन एनजीओ के फेसबुक पेज पर नौकरी की जरूरत बताते हुए बायोडाटा अपलोड किया। यशोदा आज द बॉडी शॉप वर्किंग में काम कर रही हैं।
केस-दो
शिवाला निवासी यावर अब्बासी एक मशहूर फैशन ब्रांड के शोरूम में काम कर रहे थे। लॉकडाउन में शोरूम बंद हुआ तो यावर को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। यावर ने एनजीओ की मेल पर अपना बायोडाटा भेजा। एनजीओ के वालंटियर रवि तिवारी की पहल से अब वे ब्लैकबेरी के स्टोर में काम कर रहे हैं।
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कोरोना के कारण घर लौट रहा हर मजबूर मजदूर नहीं होता और सरकारी योजनाएं हर हुनरमंद को सही काम और दाम नहीं दिला सकतीं। लॉकडाउन में रोजगार गंवा चुके ऐसे हुनरमंदों का दर्द समझते हुए शहर के युवा उनकी मदद को आगे आए हैं। मिशन एनजीओ से जुड़े इन युवाओं ने 50 लोगों की नौकरी लगवा दी है।
इस महीने 100 और लोगों को नौकरी मिल सकती है। एनजीओ से जुड़े युवाओं ने अपने-अपने संपर्कों के जरिए उन लोगों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी, जिनकी नौकरियां चली गई हैं। जैसे-जैसे नौकरी चाहने वालों का डाटा तैयार होता गया, एनजीओ के सदस्यों ने इसे सोशल मीडिया के फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम के जरिए शेयर करना शुरू कर दिया। युवाओं ने उन लोगों से भी संपर्क किया, जिन्हें हुनरमंद हाथों की जरूरत थी।
युवाओं की पहल का परिणाम है कि बेरोजगारों को उनके मन का काम मिलने लगा है। मिशन एनजीओ से जुड़े अंसार शेख, कमल यादव, कविता प्रकाश ने बताया कि लॉकडाउन में सामाजिक कार्यों के दौरान उनके पास लगातार बेरोजगार हो चुके लोगों की जानकारी मिल रही थी।
हम लोग ऐसे लोगों से भी मिले, जिनके यहां से काम करने वाले चले गए या तीन महीने की छुट्टियों के दौरान कुछ और काम करने लगे। बस यहीं से उनके मन में यह विचार आया। जिन्हें काम चाहिए था और जिन्हें हुनरमंद कामगार चाहिए थे, दोनों की लिस्ट तैयार होने लगी। सोशल मीडिया पर दोनों की ही जानकारियां शेयर कर दीं और इसका परिणाम सामने
आने लगा।
संस्था से जुड़ी दीप्ति सक्सेना और नितेश सिंह ने बताया कि तकरीबन 1200 बेरोजगार अभी तक संस्था से जुड़ चुके हैं। 4000 नौकरियां संस्था के पास आ चुकी हैं। लोगों की काबिलियत के हिसाब से आवश्यकताओं की पूर्ति करना मुश्किल था, मगर संस्था अभी तक 50 लोगों को नौकरी दिलवा चुकी है। 100 से अधिक लोग उद्योग शुरू होते ही रोजगार पाएंगे।
मध्य वर्ग के युवा सबसे ज्यादा परेशान
संस्था के सदस्यों ने बताया कि करीब दो माह पहले डाटा जुटाने का काम शुरू किया गया था। एक महीने तक जानकारी जुटाई गई फिर रोजगार पहल के नाम पर इसे सोशल मीडिया साइट पर शेयर किया गया। इस दौरान देखने में आया कि सबसे ज्यादा परेशानी मध्य वर्ग के युवाओं को हुई है। कंप्यूटर ऑपरेटर, मार्केटिंग, शोरूम में सेल्स से जुड़े, कोचिंग संस्थानों या ट्यूशन पढ़ाने वालों युवाओं ने सबसे अधिक नौकरियां गंवाई हैं। परेशानी की बात यह है कि अभी इन सेक्टर में नई जॉब मिल भी नहीं रही।
मदद लेनी हो या मददगार बनना है तो...
यदि आप रोजगार पाना चाहते हैं या देना चाहते हैं तो संस्था के फेसबुक पेज all NGO Kanpur group या mission NGO humanity @ gmail.com पर जानकारी भेज सकते हैं। संस्था के युवाओं ने इस पहल से जुड़ने की अपील की है। कहा है कि इसका खूब प्रसार करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके।