अंजलि के भाई आयुष, पिता प्रबल व दूसरी बहन बाइक से थे। अंजलि की मौत ने इतना झकझोरा कि एंबुलेंस की ओर परिजन का ध्यान ही नहीं गया। किसी ने एंबुलेंस व्यवस्था होने को लेकर शायद ही ध्यान दिलाया हो। आयुष बाइक पर बैठा। दूसरी बहन पीछे बैठी।
बीच में पिता ने अंजलि का शव रखा। संतुलन न बिगड़े इसके लिए दुपट्टे से अंजलि का शव भाई आयुष ने पीठ पर बांध लिया। तकरीबन 15 से 20 मिनट तक यह सब सीएचसी परिसर में चलता रहा। हर किसी की निगाहें बाइक पर टिकी रहीं।
इस संबंध में सीएचसी अधीक्षक का कहना था कि शव ले जाने के लिए वाहन मांगा जाता तो जरूर दिया जाता। अगर कोई वाहन नहीं होता है तो वाहन 100 शैया अस्पताल से मंगाकर कर शव घर भेजा जाता है। बाइक पर शव ले जाने के संबंध में जानकारी नहीं है। अगर कोई ऐसा मामला है तो जो जानकारी की जाएगी।
सवाल यह है कि अस्पताल से शव को घर तक पहुंचाने के लिए वाहन मिले यह किसकी जिम्मेदारी है। इस समय जिले में सिर्फ दो शव वाहन हैं। इनमें से एक मेडिकल कॉलेज में रहता है, जबकि एक 50 बेड के अस्पताल में। इन्हें आने में कम से कम पौने दो घंटे का समय लगता है।
सपा ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- ये बेहद शर्मनाक
औरैया के मामले को लेकर सपा ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर लिखा गया है कि योगी सरकार में स्वास्थ्य सेवाओं का निकला जनाज़ा...बहन के शव को बाइक से घर ले गया भाई! औरैया के बिधूना में सीएचसी के बाहर बाइक पर बहन के शव को पीठ पर बांधकर घर ले जाने की खबर बेहद दुखद एवं इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना है। विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार का प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग एक एम्बुलेंस का इंतजाम न कर सका।
डिप्टी सीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देष
जनपद औरैया के सीएचसी, बिधूना में शव को पीठ पर बांधकर बाइक से ले जाने संबंधी वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सीएचसी अधीक्षक और उक्त प्रकरण से संबंधित डॉक्टरों को भविष्य के लिए एक-एक प्रतिकूल प्रवष्टि देकर तत्काल हटाए जाने के आदेश मुख्य चिकित्सा अधिकारी, औरैया को दिए हैं।