विजय बहुत खुश था, हो भी क्यों न... रविवार को उसकी बरात जो जानी थी। घर में रिश्तेदार आ चुके थे, शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। तैल पूजन, मेहंदी की रस्म के बाद शनिवार को मंगल गीत गाए जा रहे थे। इसी बीच विजय घूमने जाने की बात कहकर खुशी-खुशी घर से निकलता है। अचानक उसके पास किसी का फोन आता और वह तनाव में आ जाता है।
यहां से सीधे वह ब्रह्मनगर स्थित अपने किराये के मकान में पहुंचता है और फंदा लगाकर जान दे देता है। शादी की खुशियां मातम में बदल जाती हैं। पुलिस विजय का मोबाइल जब्त कर पता करने में जुटी है कि आखिर किसका फोन आने के बाद शादी के ठीक एक दिन पहले विजय इतना बड़ा कदम उठा लेता है। वैसे तो विजय निषाद (28) मूल रूप से बर्रा के बनपुरवा गांव का रहने वाला था। गड़रियनपुरवा में कमानी का काम करने की वजह से नजीराबाद के ब्रह्मनगर में रोमी के घर में किराये पर रहता था।
उसकी शादी रायबरेली के डलमऊ निवासी युवती से तय हुई थी। रविवार को उसकी बरात जानी थी। परिवार में मां उमा, दो भाई अजय, विशाल, तीन बहनें रीतू, नीशू और नीलू हैं। शनिवार को बर्रा स्थित घर में शादी की रस्में होने के बाद वह भांजे सेजल के साथ घूमने के लिए कहकर निकला था। इसके बाद उसने भांजे को घर भेज दिया और खुद कुछ देर बाद आने की बात कही। देर रात तक घर न लौटने पर परिजनों ने उसे फोन किया, जो बंद बताने लगा। देर रात ब्रह्मनगर में रहने वाले विजय के पड़ोसी ने उसकी खुदकुशी करने की सूचना दी। इसके बाद परिवार वाले वहां पहुंचे।
फोन आने के बाद मामा ने मुझे घर भेज दिया
परिजनों ने बताया कि शनिवार को विजय बहुत खुश था। भांजे सेजल ने बताया कि रास्ते में मामा विजय के पास एक कॉल आई थी। उससे बात करने के बाद मामा तनाव में आ गए। इसके बाद ही उसे घर जाने को कहा और खुद किराये के कमरे में पहुंच गए। वहां उन्होंने खुदकुशी कर ली। थाना प्रभारी कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि विजय का मोबाइल लॉक है। उसे खुलवाकर आखिरी फोन नंबर का पता किया जाएगा। वह नंबर किसका है, उससे पूछताछ के बाद ही कुछ स्पष्ट हो सकता है।
जिस दिन जानी थी बरात, उस दिन उठी अर्थी
विजय की रविवार को बरात जानी थी। पोस्टमार्टम के बाद जब उसकी अर्थी उठी तो बहनें और माता-पिता बिलख उठे। उनका रोना देख मोहल्ले के लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।