कोई जमीन, भवन, दुकान खरीदने से पहले उसके दस्तावेज अपने स्तर से जरूर परख लें। रजिस्ट्री दफ्तर में संबंधित जमीन, दुकान, भवन के दस्तावेजों की वैधानिकता परखने का प्रावधान नहीं है। इसलिए फर्जी तरीके से रजिस्ट्री हो जाती है। हालत यह है कि शत्रु संपत्ति तो दूर ताजमहल तक की रजिस्ट्री हो सकती है।
ताजमहल
अधिवक्ता अश्विनी आनंद ने बताया कि रजिस्ट्री दफ्तर में बिक्री और खरीदने वाले के बीच दस्तावेज का रजिस्ट्रेशन होता है। संबंधित जमीन बेचने वाला ही उस जमीन का हकदार है, यह जिम्मेदारी सब रजिस्ट्रार की नहीं होती है। अधिवक्ता वसीम अख्तर ने कहा कि प्रापर्टी के असली मालिक के बारे में रजिस्ट्री दफ्तर कोई जानकारी नहीं कर सकता है। इसलिए कई बार फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करने की बात सामने आती रहती हैं।
डेमो पिक
अब बायोमेट्रिक होने के कारण फर्जीवाड़े पर थोड़ी रोक लगी है। पहले मैनुअल रजिस्ट्री के वक्त फर्जीवाड़ा ज्यादा था। बायोमेट्रिक होने से प्रापर्टी बेचने वाला का पूरा ब्योरा रजिस्ट्री दफ्तर में आ जाता है।
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एआईजी स्टांप देवेंद्र सिंह का कहना है कि सब रजिस्ट्रार को किसी संपत्ति की जांच-पड़ताल का कानूनी अधिकार नहीं है। वह रजिस्ट्री करते समय स्टांप की जांच करते हैं। देखते हैं कि नियमानुसार स्टांप लगा है या नहीं।