कानपुर मेडिकल कॉलेज में पहली बार हुई स्टेट टास्क फोर्स की मीटिंग में शामिल होने आए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र कुमार डॉक्टरों के सवालों का सीधा और स्पष्ट जवाब देने से कन्नी काट गए। मंत्री जी ने वही किया जो आमतौर पर नेतागण करते रहे हैं, जबकि इससे पहले मंत्री जी ने अपने आप को सर्वसाधारण दिखाने की भरपूर कोशिश की।
जब वे कार्यक्रम में पहुंचे तो उनके लिए विशेष कुर्सी का बंदोबस्त किया गया था लेकिन उन्होंने जाते ही अपने अर्दली को कहकर वहां से कुर्सी हटवा दी। उन्होंने वहां मौजूद लोगों और कार्यक्रम आयोजक से कहा कि मैं भी आप लोगों की तरह आम हूं तो ये विशेष बंदोबस्त क्यों...? फिर कुर्सी को मंच से हटाकर उनके लिए भी वैसी ही आम कुर्सी रख दी गई जैसी मंच पर अन्य लोगों के लिए कुर्सियां लगाई गई थी।
इसके बाद संस्कृत के श्लोक और अंग्रेजी मिश्रित भाषण के जरिये उन्होंने टीबी की भयावहता के कुछ आंकड़े पेश किए और डॉक्टरों से ही सवाल कर दिया कि ऐसी स्थिति में टीबी से कैसे लडे़ेंगे। जोर इस बात पर दिया कि प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक टीबी खत्म करने का लक्ष्य दिया है। इसलिए घर घर जाएं और टीबी के मरीज चिह्नित करें।
उन्होंने कहाकि डॉक्टर भगवान के प्रतिनिधि हैं। हर स्थिति में हर मर्ज को खत्म करने की मूल जिम्मेदारी उन्हीं की है। यह काम दुनिया में कोई दूसरा नहीं कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास दवा है, डॉक्टर हैं, अस्पताल हैं, अन्य संसाधन हैं लेकिन मरीज नहीं हैं। मरीजों को ढूंढ निकालने का काम डॉक्टरों का ही है। पत्रकारों ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और हैलट की दुर्दशा पर सवाल किए तो हाथ जोड़ लिए। बोले, आज सिर्फ टीबी पर बात होगी।
- 32वीं यूपी स्टेट टास्क फोर्स की मीटिंग में बोले टीबी रोग विशेषज्ञ
- टीबी के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हुए प्रदेश के 48 मेडिकल कालेज
- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. महेंद्र सिंह का भाषण विशुद्ध राजनीतिक
- अस्पतालों और मेडिकल कालेज की दुर्दशा के सवाल जोड़ लिए हाथ
- उत्तर प्रदेश सरकार के स्वास्थय एंव चिकित्सा मंत्री महेंद्र कुमार