कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में एक महिला की चोटिल आंख की पुतली बचाने के लिए यमन की तकनीक का उपयोग किया गया। इसमें बिना टांके आंख में लेंस लगाया और पुतली को छोटा किया।
विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि पिंकी देवी (28) की आंख में लकड़ी से चोट लगने के कारण लेंस टूटकर लटक गया था। इससे उनकी आंख की पुतली का आकार बड़ा हो गया और रोशनी बाधित हुई। चोट से स्फिंकटर पैरालिसिस और ट्रॉमेटिक मिड्रियासिस हो गई थी। आंखों की तंत्रिकाएं प्रभावित होने से पुतली बड़ी हो गई थी। इस जटिल स्थिति के लिए यमन की तकनीक प्यूपिलोप्लास्टी करनी पड़ी। हैलट अस्पताल में इस तकनीक का इस्तेमाल पहली बार किया गया है।
इस सर्जरी में रोगी की आंख की पुतली को रिपेयर किया गया। टूटा हुआ लेंस निकालकर उसकी जगह नया लेंस बिना टांका लगाए लगाया गया। यह यमन में खोजी गई एक नवीनतम तकनीक है जिसमें टांके नहीं लगते। सेकेंडरी लेंस के सिरे पुतली में डालकर उन्हें जलाकर मोटा किया जाता है। फिर उन्हें पलटकर पुतली के रास्ते में डाला जाता है जिससे लेंस फंस जाता है।