जानकारी देते वीरेंद्रजीत सिंह और संस्थान की सचिव नीतू सिंह
यतींद्रजीत सिंह ‘यति भैया’ जीवन भर समाजसेवा में समर्पित रहे। उन्होंने शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ गरीबों के उत्थान के लिए कई अच्छे कार्य किए। उनके विचारों और कार्यों से प्रेरित होकर ‘यति संकल्प संस्थान’ की नींव डाली गई है। इसका उद्घाटन पांच जुलाई को होगा। यह जानकारी मंगलवार को कानपुर के सिविल लाइंस स्थित लिटिल शेफ में आयोजित वार्ता में संस्था की सचिव नीतू सिंह ने दी।
आधुनिकता और सरल सहज जीवन’ विषय पर होगी संगोष्ठी
जानकारी देते वीरेंद्रजीत सिंह और संस्थान की सचिव नीतू सिंह
संस्था के अध्यक्ष वीरेंद्रजीत सिंह ने बताया कि संस्थान का लक्ष्य शिक्षा के अलावा स्वास्थ्य, पर्यावरण सुरक्षा, गौसेवा और पिछडे़ इलाकों में रोजगार मुहैया कराना है। पांच जुलाई को होटल लिटिल शेफ में यति भैया के जन्मदिवस पर संस्था का उद्घाटन होगा। इस मौके पर संगोष्ठी होगी। इसमें सोसाइटी फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हिमालयाज, मंसूरी के संस्थापक पवन गुप्त होंगे। वह ‘आधुनिकता और सरल सहज जीवन’ विषय पर विचार रखेंगे। वह बताएंगे कि किस तरह दौड़भाग भरी जिंदगी में व्यक्ति मौलिकता खोता जा रहा है। इससे कैसे बचा जाए। इस कार्यक्रम में शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र से जुड़े जाने-माने लोग भाग लेंगे।
यती भइया के कार्यों पर एक नजर
यतींद्रजीत सिंह की पुरानी तस्वीर
यतींद्रजीत सिंह ने अनाथ बच्चों के लिए कानपुर और जम्मू में वात्सलय मंदिर बनवाया। तात्यागंज में नारायणी देवी गौशाला का निर्माण और गरीब बच्चों के लिए आधुनिक विद्यालय की स्थापना की। उन्होंने जम्मू में दीवान बद्रीनाथ विद्यालय के नाम से तीन विद्यालयों के संचालन में भी सहयोग दिया। इन विद्यालयों में गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा दी जाती है। श्री ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामंडल के माध्यम से नौ शिक्षण संस्थानों के संचालन में सहयोग दिया।
यति भइया के कामों पर एक नजर
यति भइया की बच्चों के साथ पुरानी तस्वीर
- यति भइया ने अनाथ बच्चों के लिए कानपुर और जम्मू में वात्सलय मंदिर बनवाया।
- तात्यागंज में नारायणी देवी गौशाला का निर्माण और गरीब बच्चों के लिए आधुनिक विद्यालय की स्थापना।
- जम्मू में दीवान बद्रीनाथ विद्यालय के नाम से तीन विद्यालयों का भी निर्देशन कर रहे थे। इसमें जरूरतमंद और समाज के पिछड़े वर्ग के बच्चों को शिक्षा दी जाती है।
- श्री ब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामंडल के माध्यम से नौ शिक्षण संस्थान संचालित