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जालौन में यमुना खतरे के निशान के पार

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जालौन में जोधार नाले के पुल के ऊपर से बहता यमुना का पानी - फोटो : ORAI
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उरई/कालपी। मध्य प्रदेश के माताटीला व राजस्थान के कोटा बैराज से लगातार छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी की वजह से जिले की नदियां उफान पर है। कोटा बैराज से शनिवार को एक बार फिर दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की वजह से यमुना खतरे के निशान 108 मीटर को पार कर गई है, जिससे यमुना पट्टी के गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। वहीं बेतवा का रुख रविवार को कुछ नरम पड़ा। जिससे बेतवा पट्टी के गांव के लोगों ने राहत की सांस ली।
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मध्य प्रदेश व राजस्थान आदि क्षेत्रों में हो रही बारिश की वजह से देश के कई बांध उफना गए है और लगातार बांधों का पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है। शनिवार को एक बार फिर राजस्थान के कोटा बैराज व हथिनी कुंड से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की वजह से यमुना का जल स्तर बढ़ने का सिलसिला जारी है। रविवार को दिन में तीन बजे यमुना खतरे के निशान को पार गई। एसडीएम ने बाढ़ प्रभावित ग्रामों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया और हर समस्या से निपटने का आश्वासन दिया।
एसडीएम ने सभी राजस्वकर्मियों को ऊंचाई वाली जगहों पर राहत शिविर स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं। उधर बाढ़ के चलते कालपी मगरौल संपर्क मार्ग, कालपी गुलौली संपर्क मार्ग ठप हो गए है। जिससे पचास गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है। शुक्रवार की शाम स्थिरता के बाद शनिवार सुबह 5 बजे से यमुना का जल स्तर फिर बढ़ना शुरू हुआ था जो रविवार को खतरे के निशान 108 मीटर को पार कर रविवार शाम 4 बजे 108.13 मीटर पर पहुंच गया। इससे प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकी प्रभारियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए है। वहीं कई गांवों में नावों का भी इंतजाम पूर्ण कर लिया गया है।
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गांवों में ऊंचे स्थानों पर शिविर बनाने के निर्देश
एसडीएम भैरपाल सिंह ने बाढ़ प्रभावित देवकली, मदरालालपुर, कीरतपुर, पड़री सहित लगभग एक दर्जन बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर ग्रामीणों को सजग रहने के निर्देश दिए हैं और ग्रामीणों से अपना सामान समेट कर रखने की बात कही है जिससे किसी भी विपरीत परिस्थिति में उन्हें तत्काल राहत शिविरों में पहुंचाया जा सके। उन्होंने राजस्वकर्मियों को ऊंचाई वाली जगहों पर राहत शिविर लगवाए जाने के निर्देश दिए।
इन गांवों का कटा संपर्क
मदारपुर, देवकली, रायड़, जकसिया, सुरौली, सुरौला, गुलौली, मवई, सोंधी, जकसिया, मदरालालपुर, पाली, अभिर्वा, जमरेही, मैनुपुर, पडऱी, मगरौल, नरहान, धर्मपुर, गुढ़ा खास, शेखपुर गुढ़ा, पिपरौंधा, महेवा आदि लगभग पचास गांवों का संपर्क कट गया है। यमुना किनारे गांवों के खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से सैकड़ों बीघा में लगी तिल व ज्वार की खेती नष्ट हो गई है इससे किसानों पर संकट के बादल छा गए हैं।
बाढ़ में डूबी मशीनें
अचानक आई बाढ़ से कालपी मगरौल मार्ग पर निर्माणाधीन जोंधर पुल पर लगी जेसीबी व निर्माण सामग्री बाढ़ में डूब गई। सेतु निगम के कर्मियों के अनुसार जेसीबी व सामग्री जलमग्न होने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

कालपी स्थित मगरोल मार्ग पर नाव से नदी पार करते ग्रामीण- फोटो : ORAI

यमुना नदी कालपी में रेलवे ब्रिज के नीचे बहता पानी- फोटो : ORAI

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