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अस्पताल बीमार है! हैरान कर देगी मोबाइल से दी जाने वाली एक्स-रे रिपोर्ट

Sat, 23 Feb 2019 08:01 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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एक्स-रे देखते हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुवीर सिंह और रेडियोलॉजिस्ट - फोटो : अमर उजाला
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करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी मरीजों को कन्नौज जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे की रिपोर्ट फिल्म तो दूर ए-4 पेपर तक पर नहीं दी जाती है। रेडियोलॉजिस्ट मरीजों को उनके एंड्रॉयड मोबाइल से कंप्यूटर स्क्रीन पर एक्स-रे की फोटो खींच कर दे रहे हैं। इसके बाद मरीज और उनके परिजन अस्थि रोग विशेषज्ञ को मोबाइल पर फ्रैक्चर की फोटो दिखाकर परामर्श लेते हैं। जिन मरीजों के पास एंड्रॉयड फोन नहीं हैं, वह निजी जांच केंद्रों से एक्स-रे कराने को मजबूर हैं। 
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मरीजों की सुविधाओं के लिए मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में लगभग दो साल पहले डिजिटल एक्स-रे मशीन लगी थी। तभी से एक्स-रे प्लेट के नाम पर खेल हो रहा है। मरीजों को एक्स-रे की रिपोर्ट प्लेट पर देना तो दूर, ए-4 पेपर तक पर नहीं दी जाती है। मरीजों और उनके परिजनों को जुगाड़ से एक्स-रे की रिपोर्ट दी जाती है। एक्स-रे के बाद कंप्यूटर की स्क्रीन से मोबाइल से फोटो खींचकर दी जाती है। अस्थि रोग विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल मशीन से एक्स-रे के बाद कंप्यूटर प्रिंटर से प्लेट या पेपर पर शीट निकाली जाती है।
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हड्डी रोग विशेषज्ञों को लगानी पड़ती दौड़ 

सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल को दो तरह की एक्स-रे फिल्म आपूर्ति की जाती है। इसमें एक फिल्म मैन्युअल मशीन के लिए होती है। इसकी कीमत लगभग दो हजार रुपये होती है। एक शीट पर 50 एक्स-रे निकलते हैं। दूसरी फिल्म डिजिटल एक्स-रे मशीन के लिए होती है। यह शीट लगभग पांच हजार रुपये की होती है। एक शीट पर 125 एक्स-रे का प्रिंट निकलता है।

जिला अस्पताल में प्रतिदिन 60-70 मरीज एक्स-रे के लिए आते हैं। सभी मरीजों को मोबाइल पर ही एक्स-रे की फोटो दी जाती है। जिन मरीजों के पास मोबाइल नहीं होते, उन्हें प्राइवेट जांच केंद्रों से एक्स-रे करवाना पड़ता है। बाहर तीन सौ से लेकर चार सौ रुपये में एक्स-रे होता है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी शाक्य ने बताया कि शासन से  फिल्म और पेपर नहीं मिल रहा है। कई बार शासन को इस बाबत पत्र लिखा जा चुका है। 

सड़क हादसे या फिसलने पर हड्डी टूटने से मरीज का जिला अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे होता है। एक्स-रे की प्रिंट रिपोर्ट नहीं मिलती है। मरीजों के नाम का फोल्डर बनाकर एक्सरे रिपोर्ट सुरक्षित कर ली जाती है। इसके बाद चिकित्सक एक्सरे की फोटो स्वयं रोडियोलॉजी यूनिट जाकर देखते हैं। इसके बाद प्लास्टर करने के लिए अलग कमरे में जाते हैं। इससे हड्डी रोग विशेषज्ञों को कई बार एक्स-रे की फोटो देखने के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है।
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