एक्स-रे देखते हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुवीर सिंह और रेडियोलॉजिस्ट
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करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी मरीजों को कन्नौज जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे की रिपोर्ट फिल्म तो दूर ए-4 पेपर तक पर नहीं दी जाती है। रेडियोलॉजिस्ट मरीजों को उनके एंड्रॉयड मोबाइल से कंप्यूटर स्क्रीन पर एक्स-रे की फोटो खींच कर दे रहे हैं। इसके बाद मरीज और उनके परिजन अस्थि रोग विशेषज्ञ को मोबाइल पर फ्रैक्चर की फोटो दिखाकर परामर्श लेते हैं। जिन मरीजों के पास एंड्रॉयड फोन नहीं हैं, वह निजी जांच केंद्रों से एक्स-रे कराने को मजबूर हैं।
मरीजों की सुविधाओं के लिए मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में लगभग दो साल पहले डिजिटल एक्स-रे मशीन लगी थी। तभी से एक्स-रे प्लेट के नाम पर खेल हो रहा है। मरीजों को एक्स-रे की रिपोर्ट प्लेट पर देना तो दूर, ए-4 पेपर तक पर नहीं दी जाती है। मरीजों और उनके परिजनों को जुगाड़ से एक्स-रे की रिपोर्ट दी जाती है। एक्स-रे के बाद कंप्यूटर की स्क्रीन से मोबाइल से फोटो खींचकर दी जाती है। अस्थि रोग विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल मशीन से एक्स-रे के बाद कंप्यूटर प्रिंटर से प्लेट या पेपर पर शीट निकाली जाती है।