बिगड़े खानपान की आदत से हार्ट में ब्लॉकेज बढ़ता है और अगर भोजन दुरुस्त कर लिया जाए तो हार्ट की धमनियों में होने वाले ब्लॉकेज को धीरे-धीरे दुरुस्त भी किया जा सकता है। यह बात रविवार को कानपुर में अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के बैनर तले मोतीझील में आयोजित आयुर्वेद पर्व के दूसरे दिन तकनीकी सत्र में बताई गई।
हृदय रोग से संबंधित तकनीकी सत्र में मुंबई से आए डॉ. रोहित साणे ने बताया कि शोध में 240 जानवरों और दो हजार मनुष्यों पर ट्रायल किया गया, जो सफल रहा। बाद में यह शोध यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलोजी समेत कई अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हुआ।
डॉ. साणे ने शोध के विभिन्न चरणों के संबंध में बताया। वर्ष 2001 से शुरू हुए इस शोध के अब तक चार चरण पूरे हो चुके हैं। शोध अभी जारी है। इसमें आयुर्वेदिक और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के इलाज का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया।
डेमो पिक
शोध के आंकड़ों की स्लाइड के माध्यम से उन्होंने बताया कि हार्ट ब्लॉकेज में वृक्षमाला, आमला बेतास, पुष्कर मूल, मातुलुंगा आदि जड़ी-बूटियों का सेवन कराने से रोगियों के हॉर्ट ब्लॉकेज कम हुए। उन्होंने बताया कि जड़ी-बूटियां बिना साइड इफैक्ट के रोग ठीक कर देती हैं।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा रोगियों की डाइट किट अलग से तैयार की गई है। डाइट किट में रोगियों का हर दिन का भोजन तय रहता है। इस भोजन में कार्बोहाइड्रेट कम किया जाता है और प्रोटीन बढ़ाई जाती है।
रोगी की जरूरत के मुताबिक विटामिन रहते हैं। इससे रोगी के हार्ट की सेहत सुधरने लगती है। रोगी को पंचकर्म कराया जाता है। क्रोनिक हार्ट फेल्योर के मरीजों को संपूर्ण हृदय शुद्धिकरण कराया जाता है। 690 मरीजों पर इसका ट्रायल कराया, जो सफल रहा। यह शोध दि लेंसेट जर्नल में भी प्रकाशित हुआ। तकनीकी सत्र में डॉ. हीतेश कौशिक, डॉ. बीना हिमांशु शर्मा, डॉ. संजीव रस्तोगी, डॉ. राजकुमार ने विभिन्न रोगों के संबंध में शोध पत्र प्रस्तुत किए। अंत में शोध प्रस्तोता शोधार्थियों को सम्मानित किया गया।