इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा का कहना है कि हृदय रोगी अब जल्दी गंभीर हो जा रहे हैं। रोगियों की हालत बिगड़ती है तो उन्हें सीधे इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती करना पड़ता है। कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में एंजियोप्लास्टी कराने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। रोगियों के हृदय की आर्टरी ब्लॉक हो जा रही है। 10 सालों में एंजियोप्लास्टी एवं बैलून माइट्रल कराने वालों की संख्या 14 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। कोरोना काल के बाद ऐसे रोगियों की भी संख्या बढ़ी है, जिन्हें हार्ट अटैक पड़ते ही मौत हो जा रही है।
25 से 30 साल वाले मरीजों की भी संख्या बढ़ी
पहले 45 साल से अधिक आयु के रोगियों की संख्या अधिक होती रही है, लेकिन अब कम आयु के लोग भी हृदय रोग का शिकार हो रहे हैं। कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में 25 से 30 साल आयु वर्ग के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. उमेश्वर पांडेय का कहना है कि ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के पुराने रोगियों में हृदय रोग हो जाता है। बीपी के 10 फीसदी और डायबिटीज के एक तिहाई रोगियों में हृदय की दिक्कत भी बढ़ जाती है।
क्या कहता है आंकड़ों का गणित
वर्ष 2011-12
ओपीडी-122634 रोगी
इंडोर-6954 रोगी
वर्ष 2021-22
ओपीडी-245787 रोगी
इंडोर-16332 रोगी
वर्ष-2011-12
एंजियोप्लास्टी-264
पेस मेकर-355
वर्ष 2021-22
एंजियोप्लास्टी-3790
पेस मेकर-802
ये है कारण
- अधिक वजन, हाइपरटेंशन, डायबिटीज
- बिगड़ी दिनचर्या और खानपान
- आपाधापी और तनाव
दिल चीज क्या है... बस मेरा कहा मान लीजिए
- ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराते रहें
- नियमित व्यायाम करें
- घी-तेल व चिकने भोजन से बचें
- मानसिक तनाव न लें, सकारात्मक विचार रखें
- धूम्रपान न करें, तंबाकू के सेवन से भी बचें
- मौसम का बदलाव होने पर जांच कराएं और दवा की खुराक दुरुस्त कराएं।
(डॉ. विनय कृष्णा, निदेशक कार्डियोलॉजी)