झाड़-पतझड़ से भरी नहर, सिल्ट की सफाई करते श्रमिक, नजर आया मिट्टी का बर्तन, बर्तन पर एक फावड़ा पड़ते ही चमकने लगी पीले रंग की धातु। हालात कुछ एेसे हो गए कि श्रमिक एक-दूसरे को मारने पर आमादा हो गए, फिर अचानक हुई पुलिस की एंट्री...।
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यह मामला है यूपी में कानपुर देहात के अटिया रायपुर का। यहां बंबा सफाई कर रहे श्रमिकों को पांच सोने के सिक्के मिले। तभी एक श्रमिक ने एक सिक्का 21 हजार रुपये बेंच दिया। यहीं से विवाद शुरू हो गया।
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श्रमिक बंबे की सिल्ट सफाई कर रहे थे। इसी दौरान श्रमिक मुनेश सिंह को मिट्टी का बर्तन मिला। उसने फावड़े से बर्तन तोड़ा तो पीले रंग की धातु के चमकते हुए सिक्के दिखे। इसकी जानकारी साथ काम कर रहे श्रमिकों शिव सिंह, प्रेमकुमार व श्याम नारायण को हुई।
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सुनार को दिखाने की बात कहकर मुनेश ने सभी सिक्के रख लिए। उसने रसूलाबाद में सराफा दुकान पर झींझक के सुनार राजीव को सिक्का दिखाया। सोने का सिक्का होने पर सुनार ने 21 हजार रुपये में खरीद लिया।
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सोने के एक सिक्के की बिक्री के बाद श्रमिकों में विवाद होने पर पुलिस को भनक लग गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने सोने के सभी सिक्के कब्जे में लेकर छानबीन शुरू की। साथ ही पुलिस ने चारों श्रमिकों को हिरासत में ले लिया।
सोने के सिक्के गुप्तकालीन बताए जा रहे हैं, उनपर एक तरफ मां लक्ष्मी और चंद्रगुप्त द्वितीय का चित्र अंकित है। अब पुरातत्व विभाग इन सिक्कों की जांच करेगी।