उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल के 16 हजार से अधिक श्रमिक-कर्मचारियों को उनका बकाया करीब 63 करोड़ रुपये पीएफ मिल सकेगा।
कमिश्नर ने पीएफ कार्यालय और कताई मिल प्रशासन को पीएफ वापसी करने के लिए मिलकर फार्मूला तय करने के निर्देश दिए हैं। बता दें की कानपुर स्थित मुख्यालय समेत प्रदेश की 11 कताई मिलें 2011 से बंद हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार कताई मिलों को फिर से चलाने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर सरकार ने इटावा स्थित कताई मिल को 80 करोड़ रुपये में बेच दिया है और इस रकम से अन्य 10 मिलों को चरण बद्घ तरीके से चलाने की तैयारी की है।
इसके अलावा प्रदेश सरकार ने हाल ही में 17 नवंबर को जारी अनुपूरक बजट में कताई मिलों की सुरक्षा, इनके बैंक खातों को चलाने के लिए करीब 79 लाख रुपये देने की घोषणा की थी।
पीएफ कार्यालय के वरिष्ठ अफसर ने बताया कि जब सरकार ने अनुपूरक बजट में कताई मिलों की सुरक्षा व खाता संचालन के लिए बजट की घोषणा की तो जिला प्रशासन से संपर्क करके बताया गया कि इन बंद हो चुकी मिलों पर विभाग का 63 करोड़ रुपये से अधिक पीएफ बकाया है।
बिना पीएफ दिए मिल चलाना संभव नहीं हो सकेगा। इन मिलों में 16 हजार से अधिक श्रमिक-कर्मचारियों का करोड़ों पीएफ बकाया है।
इसके बाद जिला प्रशासन ने अवगत कराया कि सरकार ने इटावा की कताई मिल को बेचकर 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।
रिकवरी अफसर एके शुक्ला ने बताया कि बुधवार को कमिश्नर मो. इफ्तेखारुद्दीन की अध्यक्षता में कताई मिल प्रशासन और विभाग की बैठक बुलाई गई थी।
इसमें कमिश्नर ने कताई मिल प्रशासन और पीएफ कार्यालय को सामंजस्य के साथ बकाया पीएफ भुगतान के लिए फार्मूला तय करने के निर्देश दिए हैं।
यह भी निर्देश दिए हैं कि श्रमिकों-कर्मचारियों को जल्द से जल्द बकाया भुगतान का कार्य शुरू किया जाए।