कोहरे के चलते शुक्रवार को सेंट्रल स्टेशन पर आने वाली दो दर्जन से ज्यादा ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 16 घंटे तक देरी से पहुंची। इसके चलते स्टेशन के प्रतीक्षालय में यात्रियों की खचाखच भीड़ देखी गई।
सैकड़ों लोगों ने ट्रेन की देरी के चलते अपनी यात्रा निरस्त कर टिकट लौटा दिए तो कुछ ने बस से यात्रा पूरी की। परिचालन के डिप्टी स्टेशन इंचार्ज ने बताया कि सभी रूटों की ट्रेनों के संचालन पर कोहरे का असर पड़ा है।
प्रमुख ट्रेनें दो से 16 घंटे तक लेट रहीं। आगे यदि कोहरा न पड़ा तो इन ट्रेनों की चाल सुधरने में तीन दिन लगेंगे। यदि कोहरा ऐसे ही पड़ता रहा तो कई ट्रेनें निरस्त करनी पड़ सकती है।
गौरतलब है कि हर साल रेलवे दावा करता है कि नई तकनीकी और ट्रेनों की आधुनिक सिग्नल प्रणाली दुरुस्त कर दी गई है। इससे अब आगे कोहरे में ट्रेनों के संचालन पर फर्क नहीं पड़ेगा। बावजूद इसके कोहरा पड़ते ही रेलवे के दावों की पोल खुलने लगती है। शुक्रवार को सेंट्रल पर आने जाने वाली दो दर्जन से ज्यादा ट्रेनें लेट रही। पारसनाथ एक्सप्रेस से अहमदाबाद जाने के लिए निकले शहर के राजेंद्र कहते हैं कि उनकी ट्रेन सुबह आठ बजे की थी, इसलिए वो अपने परिवार के साथ सुबह सात बजे स्टेशन पहुंच गए, लेकिन दोपहर तीन बजे तक ट्रेन का कहीं अता पता नहीं था।
ये ट्रेनें रहीं लेट
महानंदा एक्सप्रेस 16 घंटे, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस 9.30 घंटे, स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस दस घंटे, पारसनाथ एक्सप्रेस आठ घंटे, नंदनकानन एक्सप्रेस साढ़े पांच घंटे, उत्सर्ग एक्सप्रेस 6.30 बजे, मगध एक्सप्रेस 13 घंटे लेट। इसके अलावा पुरी एक्सप्रेस, मुरी, कालका, ग्वालियर एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस, अजमेर एक्सप्रेस, मथुरा एक्सप्रेस दो से पांच घंटे तक लेट रहीं।
डाउन की जियारत एक्सप्रेस, फर्रुखाबाद पैसेंजर, सीमांचल एक्सप्रेस, कालका एक्सप्रेस, महानंदा एक्सप्रेस, वरुणा एक्सप्रेस और मैनपुरी पैसेंजर लेट रहीं।
प्लेटफार्मों पर लगा पूछताछ सिस्टम फेल
सेंट्रल स्टेशन के कई प्लेटफार्मों पर पूछताछ के लिए लगाया गया सिस्टम भी फेल रहा। नीला बटन दबाकर ट्रेनों के बारे में जानकारी के बारे तो लिखा था लेकिन बटन ही गायब था। इससे तमाम यात्रा उसे देखकर लौट गए।