कन्नौज के रहने वाले एक मजदूर का बेटा 18 साल तक मूक रहा। किसी से एक शब्द न बोला, मां-बाप यही समझते रहे कि वह मूक-बधिर है, लेकिन रविवार को कॉक्लियर इम्प्लांट रजिस्ट्रेशन शिविर में वह अचानक बोल पड़ा तो सब चौंक गए। शिविर का आयोजन स्वरूपनगर स्थित डॉ. लालचंदानी ईएनटी सेंटर में किया गया था।
यहां चेक अप के दौरान जब वह ठीक पाया गया तो सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. देवेंद्र लालचंदानी उससे जोर देते रहे कि बोलो, तुम बोल सकते, बोलो, बार-बार ये शब्द दोहराने पर उसके मुंह से आवाज फूट पड़ी। डॉ. लालचंदानी ने बताया कि इसे साइकोलॉजिकल एफोनिया नामक बीमारी कहते हैं।
इसमें रोगी अपने दिमाग में यह तय कर लेता है कि वह बोल नहीं सकता। मानसिक रूप से खुद को अक्षम महसूस करता है और बोलने की कोशिश ही नहीं करता है। हजारों में एक रोगी ऐसा होता है। घरवाले भी उसे मूक-बधिर समझ कर बुलवाने का प्रयास नहीं करते। बेटे की आवाज सुनकर घर वाले बहुत खुश हुए।
शिविर में कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए 35 रोगियों ने रजिस्ट्रेशन करवाए। इनमें 17 रोगी ऑपरेशन के लिए उपयुक्त पाए गए। डॉ. लालचंदानी ने बताया कि इनमें आठ महीने से लेकर पांच साल तक के रोगी हैं। इनकी जांचें करवाने के बाद निशुल्क कॉक्लियर इम्प्लांट किया जाएगा। इम्प्लांट राज्य सरकार की शल्य चिकित्सा योजना के तहत लगाया जा रहा है।