कानपुर देहात। अकबरपुर के ऐतिहासिक शुक्ल तालाब में वेडिंग डेस्टिनेशन बनना है। एक साल पहले शासन की ओर से मुगल कालीन शुक्ल तालाब को विकसित करने की योजना बनी थी लेकिन शुक्ल तालाब की जमीन राजस्व विभाग में दर्ज होने के कारण विकासकर्ता संस्था से एग्रीमेंट नहीं हो सका। इसी वजह से वेडिंग डेस्टिनेशन का काम आगे नहीं बढ़ सका है।
शासन ने पीपीपी मॉडल पर शुक्ल तालाब में वेडिंग डेस्टिनेशन (विवाह स्थल) बनाने की कार्ययोजना तय की थी। इस पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। करीब एक साल पहले बंगलुरू की विकासकर्ता संस्था रेडबुड हेरीटेज लिमिटेड ने रुचि दिखाई थी और परिसर का सर्वे किया था। सर्वे के बाद विकास कर्ता संस्था व पर्यटन विभाग के बीच एग्रीमेंट होना था। तालाब की जमीन का राजस्व विभाग में दर्ज होना पाया गया, जो सुरक्षित श्रेणी की है। इसकी वजह से शुक्ल तालाब को पर्यटन विभाग के नाम दर्ज करने में अड़चन सामने आ गई। जानकारों का कहना है कि तालाब में दर्ज भूमि का स्वामित्व बदलना संभव नहीं है। इसके लिए जिला प्रशासन ने मंडलायुक्त को रिपोर्ट भेजी लेकिन निर्णय नहीं हो सका। ऐसे में वेडिंग डेस्टिनेशन का काम एक कदम भी नहीं बढ़ सका है।
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बयान......
अकबरपुर के ऐतिहासिक शुक्ल तालाब को पर्यटन विभाग के नाम दर्ज करने में नियम आड़े आ गया है। राजस्व अभिलेख में दर्ज तालाब को अन्य विभाग के नाम दर्ज नहीं किया जा सकता है। इसको लेकर पर्यटन विभाग ने वेडिंग डेस्टिनेशन योजना का ड्रॉप कर दिया है। मौखिक तौर पर इसकी जानकारी दी गई है। अभी लिखित में कोई पत्र नहीं मिला है। - अमित कुमार, एडीएम प्रशासन।
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शुक्ल तालाब की जमीन पर्यटन विभाग के नाम दर्ज नहीं होने से विकासकर्ता संस्था के साथ एग्रीमेंट नहीं हो सका है। निदेशालय स्तर से इसपर अंतिम फैसला लिया जाएगा। - अनिल सक्सेना, सहायक पर्यटन अधिकारी।
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रखरखाव की कमी से खंडहर हो रहा भवन
कानपुर इटावा हाईवे से लगा शुक्ल तालाब परिसर करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। यहां मुगल कालीन बारादरी, पक्का तालाब, महिला स्नानागार है। यह निर्माण वास्तुकला का नायाब नमूना है। करीब एक साल पहले वेडिंग डेस्टिनेशन बनाने के निर्णय से इस ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण की उम्मीद जगी थी। दरअसल ऐतिहासिक भवन के कई हिस्से देखरेख के अभाव में खंडहर हो रहे हैं।