कानपुर देहात। हर बिजली कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर लगाने के निर्देश हैं। मगर कार्यदायी संस्था सुस्त है। हालात ये हैं कि केवल सात हजार स्मार्ट मीटर ही लग सके हैं। वहीं रनियां, रायपुर, रूरा व डेरापुर में स्मार्ट मीटर लगाने काम शुरू नहीं हो सका है।
अभी पुराने मीटर लगे हैं। बिजली उपयोग के अनुसार स्क्रीन पर रीडिंग देखकर रीडर बिल बनाते हैं। कई बार रीडर मीटर की वास्तविक रीडिंग अंकित नहीं करते हैं। इससे बिल में गड़बड़ी होती है। उपभोक्ता गलत बिल जमा नहीं करते हैं। इससे बिजली निगम की राजस्व वसूली पर असर पड़ता है। स्मार्ट मीटर में प्रोब से रीडिंग की व्यवस्था होती है। इसमें रीडिंग को कम या ज्यादा नहीं किया जा सकता है। बिलिंग सुधारने और राजस्व जमा बढ़ाने की मंशा से घरों में स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत इस साल जनवरी से हुई है।
जिले में 2.75 लाख बिजली कनेक्शन हैं। इसी साल अंत तक सभी कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। अब तक करीब सात हजार स्मार्ट मीटर ही लगाए जा सके हैं। जीनस पावर सोल्यूसन प्राइवेट लिमिटेड को काम मिला है। मगर काम में सुस्ती हावी है। हालात ये हैं कि नगरीय क्षेत्र रनियां, रायपुर, रूरा व डेरापुर में स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत नहीं हो सकी है। जिले में इस कंपनी का कोई सुपरवाइजर नहीं है। न ही कार्यालय है और न ही स्टोर ही बनाया गया है।
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वर्जन.......
कार्यदायी संस्था को तेजी से स्मार्ट मीटर लगाने के लिए लगातार निर्देशित किया जा रहा है। फिलहाल स्मार्ट मीटर लगाने की गति सुस्त है। कंपनी का कोई सुपरवाइजर, कार्यालय व स्टोर न होने पर लिखा पढ़ी की गई है। कंपनी के मैनेजर व निगम के उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। - प्रमोद कुमार, एक्सईएन परीक्षण खंड
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कागजों में 40 टीमों का दावा
स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर असद खान ने बताया कि 40 टीमें बनाई गई हैं। मगर धरातल पर कोई टीम नजर नहीं आ रही है। इसकी वजह से चार निकायों में स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत नहीं हो सकी है। एक्सईएन परीक्षण खंड ने कंपनी की टीमों का काम नहीं दिखने और कहने के बाद भी टीम नहीं बढ़ाने पर नाराजगी जताई है।
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गलत बिलिंग पर लग रहे चक्कर
पुराने मीटरों में रीडिंग की गड़बड़ी गुंजाइश से उपभोक्ता परेशान हैं। हर महीनें उपकेंद्रों पर बिल ठीक कराने लोग पहुंचते हैं। कई बार भाग दौड़ अधिक होने पर लोग परेशान होते हैं। समय पर बिल संशोधन नहीं होने पर लोग बिल जमा नहीं कर पाते तो बकाया बोझ बढ़ जाता है। अकबरपुर के सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बिल गलत आ रहा है। कई चक्कर लगा चुके मगर ठीक नहीं हो सका है। रनियां के कुशल कुमार ने बताया कि रीडिंग अधिक अंकित की गई है। जबकि मीटर में रीडिंग कम है। डेरापुर के पवन कुमार ने बताया कि गलत बिल ठीक कराने को उपकेंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।