मजदूरों ने बताया कि कोठी काफी मजबूत थी, जिससे तीन बार जेसीबी तक खराब होकर बंद हो गई। दूसरी जेसीबी से फिर कोठियों को तोड़ा गया। बताया कि कोठियों में सीमेंट का प्रयोग नहीं दिखा। इनमें किसी विशेष प्रकार की पीली मिट्टी पाई गई, जो पत्थर की ईटों को जकड़े हुई थी। गंगाघाट स्टेशन मास्टर शकील ने बताया कि इस रेल लाइन पर कानपुर-लखनऊ के लिए किसी समय कोयला वाली ट्रेन चलती थी लेकिन बड़ी रेल लाइन के डबल ट्रैक होने के बाद इस लाइन को बंद कर पटरियां उखाड़ दी गई।