नगर निगम सदन की बैठक में शनिवार को पार्षदों ने जमकर ‘नौटंकी’ की। इस वजह से सदन कई बार स्थगित करनी पड़ी। महापौर जगतवीर सिंह द्रोण ने इसे बेहद शर्म की बात कही। वह बार-बार सदन से उठकर बाहर गए। यही कहते रहे कि सदन की गरिमा का सम्मान करें।
अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी, पर हंगामा जारी रहा। निर्दलीय पार्षद मनोज यादव को दूसरे दलों के सभासदों ने इतना धकियाया कि वह गिर गए पर उनकी जुबान बंद नहीं हुई। बाद में वह वहीं उल्टी करने लगे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने उन्हें हैलट में भर्ती कराया। इस बीच भाजपा और सपा के पार्षद दल नेताओं की पहल पर हंगामा बंद हुआ।
सुबह करीब 10:20 बजे बैठक शुरू होने पर महापौर ने शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की योजना की बात कहनी शुरू की। तभी कई पार्षद हो-हल्ला मचाने लगे। बोले, उन्हें जो हैंडपंप देने की जो बात कही गई थी, उसका क्या हुआ? इसी बीच सपा के नवीन पंडित चाभियों का बड़ा गुच्छा लेकर सदन में लहराते हुए चिल्लाने लगे कि हाउस टैक्स बढ़ाने से लोग घर बंद कर चाभियां उन्हें देकर गांव चले गए हैं।
उनके साथ सपा के कुछ और पार्षद भी चिल्लाने लगे। महापौर बिना कुछ बोले सदन छोड़कर चले गए। कुछ देर बाद फिर सदन शुरू हुई तो पार्षद सुजीत सचान नाली सफाई के मुद्दे पर सदन के घेरे में आकर जमीन पर बैठ गए। कुछ लोगों ने उन्हें उठाकर उनकी सीट पर भेजा तो वे वहीं से चिल्लाने लगे, तभी निर्दलीय पार्षद मनोज यादव जोर से बोलते हुए हुए सुजीत की तरफ दौड़े तो हंगामा फिर बढ़ गया। कई पार्षद एक साथ मनोज को धक्का देते उनकी सीट पर ले जाने लगे।
मनोज का पैर लड़खड़ाने से वह गिर गए।
पता चला कि कुछ दिन पहले उन्हें डेंगू हुआ था, जिस वजह से चक्कर आ गया था। उल्टी भी होने लगी। महापौर फिर उठकर चले गए। आखिरी में विधायक रघुनंदन भदौरिया के खिलाफ सपा पार्षदों ने नारेबाजी कर दी। तीसरी बार सदन चली और कई फैसले लिए गए।